अलवर , जून 22 -- राजस्थान में अलवर जिले के सरिस्का बाघ अभयारण्य में बफर क्षेत्र से इन दिनों ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं, जो सिर्फ वन्यजीव प्रेमियों को रोमांचित नहीं कर रहीं, बल्कि जंगल के राजा के एक संवेदनशील और जिम्मेदार रूप से भी परिचित करा रही हैं।
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार आमतौर पर बाघ को एक अकेले और आक्रामक शिकारी के रूप में देखा जाता है, लेकिन अलवर बफर क्षेत्र में चर्चित एसटी-18 'सुल्तान' इन दिनों अपने शावकों की सुरक्षा और निगरानी करते नजर आ रहा है।
जंगल की हर पगडंडी, हर नाले और हर झाड़ी के आसपास इन दिनों एक परिवार की मौजूदगी देखी जा सकती है। बाघिन एसटी-19 अपने चार नन्हे शावकों के साथ घूम रही है और उनके आसपास ही 'सुल्तान' की गतिविधियां लगातार देखी जा रही हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह महज संयोग नहीं, बल्कि अपने परिवार के प्रति एक नर बाघ की सतर्क मौजूदगी का संकेत है।
हाल ही में गंगोड़ी क्षेत्र में जो दृश्य पर्यटकों ने देखा, वह सरिस्का के इतिहास की यादगार घटनाओं में शामिल हो सकता है। वन्यजीव प्रेमी चिन्मय के अनुसार, महज 100 मीटर के दायरे में एक साथ छह बाघों को देखा गया।
सबसे पहले एक नाले में आराम फरमाते हुए एसटी-18 'सुल्तान' दिखाई दिया। पर्यटक अभी उस दृश्य के रोमांच से बाहर भी नहीं निकले थे कि कुछ दूरी पर एसटी-19 अपने चार शावकों के साथ नजर आयी। एक ही क्षेत्र में पिता, मां और चार शावकों की मौजूदगी ने पर्यटकों को रोमांचित कर दिया।
वन अधिकारियों और वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि जिस तरह पिछले दो महीनों से 'सुल्तान' लगातार बफर क्षेत्र में सक्रिय है और एसटी-19 एवं उसके शावकों के आसपास देखा जा रहा है, उससे यह महसूस होता है कि वह अपने परिवार की निगरानी कर रहा है।
बाघों की दुनिया में नर बाघ का ऐसा व्यवहार कम ही देखने को मिलता है, लेकिन सरिस्का का यह 'सुल्तान' मानो यह संदेश दे रहा है कि जंगल में भी रिश्तों की अपनी अहमियत होती है। वह दूरी बनाकर रहते हुए भी अपने शावकों के आसपास मौजूद है, जैसे हर खतरे पर उसकी नजर हो।
एक समय था जब पर्यटक बाघों के दीदार के लिए देश के दूसरे बाघ अभयारण्यों रुख करते थे, लेकिन अब सरिस्का का बफर क्षेत्र खुद एक बड़ी पहचान बनता जा रहा है। बाघों के लगातार दिखने से बाहर से आये पर्यटक भी प्रभावित हैं।
कई पर्यटकों ने कहा कि अब उन्हें बाघ देखने के लिए कहीं और जाने की जरूरत महसूस नहीं होती, क्योंकि सरिस्का में उन्हें रोमांच, प्रकृति और वन्यजीवों का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।
'सुल्तान' को जंगल में एक गुस्सैल और बेहद सतर्क बाघ माना जाता है। वह पर्यटकों को कम ही दिखाई देता है और अधिकतर समय जंगल की गहराइयों में रहना पसंद करता है, लेकिन इन दिनों उसका लगातार बफर क्षेत्र में सक्रिय रहना और शावकों के आसपास दिखना वन्यजीव प्रेमियों के लिए कौतुहल का विषय बना हुआ है।
सरिस्का के जंगलों में इन दिनों सिर्फ बाघों की दहाड़ ही नहीं गूंज रही, बल्कि एक पिता की मौन जिम्मेदारी भी महसूस की जा रही है। 'सुल्तान' की यह कहानी बता रही है कि जंगल का राजा सिर्फ ताकत का प्रतीक नहीं, बल्कि अपने वंश और परिवार की सुरक्षा का प्रहरी भी है। यही वजह है कि सरिस्का आने वाला हर पर्यटक इस दृश्य को कैमरे में नहीं, बल्कि दिल में कैद करके ले जा रहा है।
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