देहरादून , अप्रैल 13 -- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, योग गुरु स्वामी रामदेव और परमार्थ निकेतन के केंद्रीय अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने संयुक्त रूप से बहुप्रतीक्षित आध्यात्मिक फिल्म "श्री बाबा नीब करौरी महाराज" का सोमवार को यहां प्रोमो और पोस्टर का भव्य विमोचन किया गया। यह फिल्म आगामी 24 अप्रैल को देश भर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जायगी। गौरतलब है कि उत्तराखंड सदियों से साधकों, संतों और श्रद्धालुओं के लिए आस्था और साधना का केंद्र है। इस पावन भूमि में स्थित है दिव्य तीर्थ कैंची धाम जिसे बाबा नीम करौरी महाराज की साधना स्थली है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फिल्म केवल एक सिनेमाई प्रस्तुति नहीं है, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और मानवता के उच्च आदर्शों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने का एक सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि बाबा नीब करौरी महाराज जी का दिव्य जीवन आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी शिक्षाएँ सरलता, करुणा, सेवा और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश देती हैं, जो वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक हैं।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर आधारित प्रयास भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के संरक्षण एवं प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह फिल्म समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगी और नई पीढ़ी को अपने सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों, निर्देशक एवं निर्माता दल को इस सराहनीय एवं आध्यात्मिक प्रयास के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि पूज्य संतों और महापुरुषों का जीवन केवल हमारा इतिहास नहीं, बल्कि जीवंत प्रेरणा है। उनके जीवन पर फिल्में बनना अत्यंत आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ उस दिव्य आस्था, गहन ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना को समझ सकें, जिसे उन्होंने तप, साधना और एकांत गुफाओं-कन्दराओं में रहकर प्राप्त किया और मानवता को समर्पित किया। उनके उपदेश, मंत्र और संदेश जीवन को दिशा देने वाले प्रकाश स्तंभ हैं। यदि इन्हें सिनेमा के माध्यम से प्रस्तुत किया जाए, तो यह न केवल संस्कृति का संरक्षण करेगा, बल्कि युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़कर उन्हें सशक्त और जागरूक बनाएगा।
योग गुरु रामदेव ने कहा कि उत्तराखंड की यह पावन भूमि केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि योग, आयुर्वेद और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत केंद्र है। यहाँ की वादियों में साधना की ऊर्जा और प्रकृति की पवित्रता समाहित है, जो हमें स्वस्थ, संतुलित और जागरूक जीवन की ओर प्रेरित करती है। हमें अपने संतों, ऋषियों और महापुरुषों की इस महान परंपरा को सहेजना और आगे बढ़ाना होगा।
उल्लेखनीय है कि फिल्म में बाबा जी की भूमिका प्रसिद्ध अभिनेता सुभोध भावे द्वारा निभाई गई है, जिन्होंने अपने सशक्त अभिनय से इस दिव्य चरित्र को जीवंत किया है। वहीं, सिद्धि मां की भूमिका में समीक्षा भटनागर ने अत्यंत भावपूर्ण अभिनय प्रस्तुत किया है। फिल्म का निर्देशन एवं लेखन शरद सिंह ठाकुर द्वारा किया गया है, जिन्होंने इस आध्यात्मिक कथा को संवेदनशीलता और गहराई के साथ पर्दे पर उतारा है। फिल्म का निर्माण अनिशा फिल्म्स इंटरनेशनल के बैनर तले किया गया है, जिसमें पीसी ज्वेलर लिमिटेड और बीएसआर फिल्म प्रोडक्शन का महत्वपूर्ण सहयोग रहा है। इस परियोजना के प्रमुख निर्माताओं में बलराम गर्ग, बलवीर सिंह, शरद सिंह ठाकुर, खड़ग सिंह गौर और नीलम सिंह शामिल हैं, जिन्होंने इस दिव्य कथा को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया है।
आयोजकों का मानना है कि यह फिल्म भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों और आध्यात्मिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आज के भागदौड़ भरे जीवन में, जहाँ मानसिक तनाव और अस्थिरता बढ़ती जा रही है, ऐसे में यह फिल्म शांति, संतुलन और आंतरिक शक्ति का संदेश लेकर आयेगी।
आयोजकों ने कहा कि श्री बाबा नीम करोली महाराज" केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि मानवता, सेवा, प्रेम और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का संदेश देने वाली दिव्य कथा है। यह फिल्म हर दर्शक के हृदय को स्पर्श करेगी और उन्हें अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित करेगी।
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