नयी दिल्ली , जून 08 -- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को कहा कि 'विकसित भारत' का संकल्प एक राष्ट्रीय संकल्प है, जिसमें देश के प्रत्येक नागरिक और संस्था को सहयोग करना होगा।
श्री बिरला ने चंडीगढ़ स्थित हरियाणा विधान सभा के चैम्बर में कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (सीपीए) इंडिया रीज़न ज़ोन-2 (नॉर्थ ज़ोन) कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करते हुए कहा कि आज वैश्विक परिदृश्य में बड़े बदलाव हो रहे हैं और दुनिया अनेक प्रकार के तनावों से गुज़र रही है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में भी भारत एक स्थिर, मजबूत और सुदृढ़ कानूनी ढाँचे वाले सुशासन के साथ अपनी दीर्घकालिक नीतियों और योजनाओं के बल पर निरंतर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि दुनिया के विकसित देशों में हो रहे परिवर्तनों का बारीकी से अध्ययन करते हुए भारत ने अपनी सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप समय-समय पर आवश्यक और व्यावहारिक बदलाव किए हैं। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की ओर नयी आशा और असीम संभावनाओं के साथ देख रही है, इसलिए यह समय सामूहिक प्रयासों और व्यापक सहभागिता का है।
उन्होंने आह्वान किया कि देश में ऐसा जनआंदोलन खड़ा होना चाहिए जिससे प्रत्येक नागरिक यह महसूस कर सके कि विकसित भारत के निर्माण में उसका भी अमूल्य योगदान है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा , " जब समाज के हर व्यक्ति की भागीदारी सुनिश्चित होगी, तब भारत की सामूहिक शक्ति और विशेष रूप से हमारी युवाशक्ति इतनी सुदृढ़ हो जाएगी कि हम वर्ष 2047 से पहले ही 'विकसित भारत' के संकल्प को सिद्ध कर लेंगे। कभी हमारी बढ़ती जनसंख्या को एक चुनौती माना जाता था, लेकिन आज वही युवा आबादी हमारी सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है। इसके लिए हमें अपने युवाओं को कौशल विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नवाचार के लिए तैयार करना होगा।" उन्होंने यह महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया कि हमारे विधानमंडलों में बनने वाली नीतियाँ और कानून नयी पीढ़ी की आकांक्षाओं और आवश्यकताओं के अनुरूप होने चाहिए।
श्री बिरला ने कहा कि जनसंवाद और सार्थक चर्चाओं के माध्यम से नागरिकों में यह विश्वास पैदा होना चाहिए कि यह सदन उनका अपना है और जनप्रतिनिधि उनकी वास्तविक आवाज़ हैं। इसलिए सदनों में होने वाली चर्चाएँ, नीतियाँ और कानून सदैव राष्ट्रहित से प्रेरित होने चाहिए और उनमें जनता की सहभागिता बढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि जितनी अधिक जनभागीदारी होगी, सामाजिक परिवर्तन उतना ही व्यापक और गहरा होगा। लोकतांत्रिक संस्थाओं में जुड़ाव जितना बढ़ेगा, विकसित भारत का सपना उतनी ही तेजी से साकार होगा। उन्होंने ज़ोर दिया कि चाहे ग्राम पंचायत हो, पंचायत समिति हो, जिला परिषद हो, नगर पालिका हो, विधानसभा हो या लोकसभा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में जनभागीदारी बढ़ने से नए विचार, विविध दृष्टिकोण और रचनात्मक सुझाव सामने आते हैं, जिससे विकास की गति को नयी ऊर्जा मिलती है।
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