नयी दिल्ली , जुलाई 16 -- नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापू राम मोहन ने गुरुवार को कहा कि हाल ही में शुरू की गयी 'विकसित उड़ान' योजना में पिछली योजना की तुलना में कई बदलाव किये गये हैं और इससे देश के दूर-दराज के क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी ज्यादा तेजी से बढ़ेगी।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा यहां विज्ञान भवन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के संबंधित अधिकारियों के लिए आयोजित एक कार्यशाला को संबोधित करते हुए श्री नायडू ने कहा कि 10 साल पहले शुरू की गयी 'उड़ान' (उड़े देश का आम नागरिक) योजना काफी सफल रही। अपनी तरह की उस पहली योजना से सीखते हुए नयी 'विकसित उड़ान' योजना में बदलाव किये गये हैं।
कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से बात करते हुए श्री नायडू ने कहा कि 'उड़ान' योजना का उद्देश्य देश में विमानन पारितंत्र को मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि आज बोइंग और एयरबस जैसी विमान बनाने वाली दुनिया की शीर्ष कंपनियां भारत से चार अरब डॉलर के कंपोनेंट खरीद रही हैं। आज दुनिया में बनने वाले लगभग हर विमान का कोई न कोई हिस्सा भारत में बना है।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पहले जिस हवाई अड्डे से सप्ताह में सात उड़ानें रवाना होती थीं, वे इस योजना के पात्र नहीं थे। नयी योजना में इस सीमा को बढ़ाकर सप्ताह में 14 उड़ान कर दिया गया है। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए सप्ताह में 21 उड़ानों की शर्त रखी गयी है। साथ ही, सिर्फ एक शहर के लिए उड़ान होने और पिछले एक साल में 40 हजार से कम यात्रियों की आवाजाही की स्थिति में भी हवाई अड्डे को 'उड़ान' योजना में शामिल किया जायेगा। इससे ज्यादा से ज्यादा शहरों को योजना का लाभ उठाने का मौका मिलेगा।
उन्होंने कहा कि इससे ज्यादा विमान सेवा कंपनियां उभरेंगी, एमआरओ (रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉलिंग) सेवा की मांग बढ़ेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। 'उड़ान' योजना सिर्फ संपर्क के बारे में नहीं है, एक हवाई अड्डा बनने से आसपास के इलाकों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गत 04 जुलाई को 'विकसित उड़ान' योजना का शुभारंभ किया था। इसके तहत अगले 10 साल में 100 नये एयरोड्रम और 200 हेलीपैड विकसित किये जायेंगे। इसके लिए केंद्र सरकार 28,840 करोड़ रुपये की राशि आवंटित करेगी।एयरोड्रम के विकास के लिए कुल 12,159 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता दी जायेगी। आठ साल में कुल 200 नये हेलीपोर्ट के निर्माण की भी योजना है। हर हेलीपोर्ट के लिए 15 करोड़ रुपये की मदद दी जायेगी। इस पर कुल 3,661 करोड़ रुपये खर्च होंगे। संचालन एवं रखरखाव के लिए पहले तीन साल अधिकतम 3.06 करोड़ रुपये सालाना प्रति एयरोड्रम की वित्तीय सहायता उपलब्ध होगी। प्रत्येक हेलीपोर्ट या वाटरड्रम के लिए सालाना 90 लाख रुपये की मदद तीन साल तक मिलेगी। अगले आठ साल में इस मद में कुल 2,577 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान है। योजाना में अधिकतम किराया सीमित होने से विमान सेवा कंपनियों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए 10 साल में 10,043 करोड़ रुपये का आवंटन किया जायेगा। पहले दो साल रूट आवंटन के समय तय वीजीएफ का शत-प्रतिशत दिया जायेगा।
बाद में तीसरे साल 75 प्रतिशत वीजीएफ, चौथे साल में 50 प्रतिशत वीजीएफ और पांचवें साल में 25 प्रतिशत वीजीएफ दिया जायेगा और इसके बाद इसे समाप्त कर दिया जायेगा।
साल 2016 में शुरू की गयी 'उड़ान' योजना में 96 नये हवाई अड्डे विकसित किये गये, 679 मार्गों का आवंटन किया गया, नौ ऑपरेटरों ने इसमें हिस्सा लिया, 1.68 करोड़ यात्रियों ने रियायती दरों पर विमान सफर किया और विमान सेवा कंपनियों को वीजीएफ के तौर पर 4,881 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
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