मुंबई , अप्रैल 02 -- राज्य सरकार की 'मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहिन' योजना बड़े विवाद की ओर बढ़ रही है। इस पहल की शुरुआत 'फॉर्म भरें और लाभ पाएं' के दृष्टिकोण के साथ की गयी थी, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुंचा जा सके, लेकिन हाल के डाटा सत्यापन और ई-केवाईसी प्रक्रिया में गंभीर खामियां सामने आयी हैं।

हाल के निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि लगभग 71 लाख महिलाएं इस योजना के लिए अयोग्य पायी गयी हैं। इसके बावजूद, राज्य सरकार पिछले 20 महीनों में उनके खातों में लगभग 21,300 करोड़ रुपये जमा कर चुकी है। इन अयोग्य उम्मीदवारों को बाहर कर सरकार को भविष्य में हर महीने लगभग 1,065 करोड़ रुपये की बचत होने की उम्मीद है।

जांच में खुलासा हुआ कि कई लाभार्थी अनिवार्य मानदंडों को पूरा नहीं करते थे। अयोग्य घोषित किए जाने के मुख्य कारणों में शामिल हैं-परिवार की आय 2.5 लाख रुपये की सीमा से अधिक होना, परिवार के सदस्यों का सरकारी नौकरी में होना, परिवार में चार पहिया वाहन का होना और प्रारंभिक आवेदन चरण के दौरान विकल्पों का गलत चयन।

सरकार ने स्वीकार किया है कि कई वास्तविक लाभार्थियों को तकनीकी दिक्कतों और प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ा है, जिससे वे अपना सत्यापन पूरा नहीं कर पाये। नतीजतन ई-केवाईसी की समय सीमा 30 अप्रैल 2026 तक बढ़ा दी गयी है।

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