भोपाल , जुलाई 21 -- मध्यप्रदेश विधानसभा ने मंगलवार को मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक-2026 पारित कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे सामाजिक समानता, महिला सशक्तिकरण और न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि अब "राम से लेकर रहीम तक" पूरे प्रदेश में सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू होगा। हालांकि संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत अधिसूचित जनजातीय समुदायों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।
विधेयक पारित होने के बाद विधानसभा में अपने संबोधन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में समानता का भाव सदैव सर्वोपरि रहा है। उन्होंने कहा कि यह कानून किसी भी धर्म की पूजा-पद्धति या धार्मिक रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप नहीं करेगा, बल्कि महिलाओं और बेटियों को समान अधिकार एवं न्याय सुनिश्चित करेगा।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि समान नागरिक संहिता के मसौदे पर प्राप्त सुझावों में 76 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम महिलाओं ने व्यक्तिगत रूप से इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह वर्ग लंबे समय से विभिन्न सामाजिक कुप्रथाओं से प्रभावित रहा है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधानों के अनुसार, पहली पत्नी या पति के जीवित रहते दूसरा विवाह प्रतिबंधित रहेगा। तीन तलाक और निकाह हलाला जैसी प्रथाओं को गैर-कानूनी और दंडनीय बनाया गया है तथा तलाक केवल विधिक प्रक्रिया के तहत न्यायालय के माध्यम से ही मान्य होगा।
विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए एक माह के भीतर अनिवार्य पंजीकरण का प्रावधान किया गया है। निर्धारित अवधि में पंजीकरण नहीं कराने पर तीन माह तक के कारावास अथवा 10 हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों का प्रावधान किया गया है।
नए कानून के तहत पैतृक और अर्जित संपत्ति में बेटों और बेटियों को समान उत्तराधिकार का अधिकार मिलेगा, चाहे पुत्री विवाहित हो या अविवाहित। इसके साथ ही सरोगेसी अथवा लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों को भी वैध संतान और कानूनी उत्तराधिकारी का दर्जा दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के भील, गोंड, कोरकू, बैगा, सहरिया, भारिया सहित संविधान के अनुच्छेद 342 के अंतर्गत अधिसूचित सभी जनजातीय समुदायों को उनकी परंपराओं और सांस्कृतिक विशिष्टता के संरक्षण के उद्देश्य से इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।
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