बेंगलुरु , अप्रैल 18 -- लोकसभा में परिसीमन विधेयक की पराजय के बाद कर्नाटक में राजनीतिक टकराव तेज हो गया है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस पर 'महिलाओं के साथ विश्वासघात' तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप लगाया है।
पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने कहा कि महिला आरक्षण का विरोध करना समानता के सिद्धांत का विरोध करने के बराबर है। उन्होंने बसवन्ना के अनुभव मंटप का उल्लेख करते हुए इसे समान अवसर का मॉडल बताया और कहा कि महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी का अधिकार है। उन्होंने बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर राज्य सरकार की आलोचना करते हुए तत्काल इसे वापस लेने की मांग भी की।
विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने विधेयक को रोकने को "करोड़ों महिलाओं के साथ विश्वासघात" बताया और कहा कि कांग्रेस को आगामी चुनावों में जनता का विरोध झेलना पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महिलाओं को संवैधानिक अधिकार देने के प्रयास का कांग्रेस ने समर्थन नहीं किया और महिला सशक्तिकरण को केवल कल्याणकारी योजनाओं तक सीमित कर दिया।
विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलावाड़ी नारायणस्वामी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने जानबूझकर विधेयक को विफल किया और महिलाओं का अपमान किया। उन्होंने इसे देश की लगभग आधी आबादी के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि दल परिवारवाद को बढ़ावा दे रहे हैं और आम महिलाओं के अवसर छीन रहे हैं।
भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष मालविका अविनाश ने इसे "लोकतंत्र का अपमान" करार देते हुए कहा कि देश की महिलाएं कांग्रेस को माफ नहीं करेंगी।
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