श्रीनगर , मई 18 -- कश्मीर के मुख्य मौलवी और हुर्रियत अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने सोमवार को कहा कि वैश्विक स्तर पर चल रही "जिसकी लाठी उसकी भैंस" की राजनीति दुनिया को अस्थिरता और खतरे की ओर धकेल रही है। इस वजह से लोग संयुक्त राष्ट्र सहित अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों पर से लगातार अपना विश्वास खो रहे हैं।

इस वर्ष फरवरी महीने में अमेरिकी-इजरायली हमलों में मारे गये ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को श्रद्धांजलि देने के लिए बेमिना में आगा सैयद हादी अल-मूसावी ने एक रैली का आयोजन किया था, जिसमें मौजूद लोगों को संबोधित करते हुये मीरवाइज ने उन्हें वैश्विक मुस्लिम समुदाय की एक महान शख्सियत बताया, जो लगातार उत्पीड़ितों और बेआवाज़ों, विशेष रूप से फिलिस्तीन के लोगों के लिए खड़े रहे।

मीरवाइज ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और मानवीय मूल्यों का उल्लंघन करके कोई भी युद्ध कभी भी वास्तव में नहीं जीता जा सकता है। उन्होंने कहा, "दुख की बात है कि 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' की अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पूरी दुनिया को अस्थिरता और खतरे की ओर धकेल रही है। इस वजह से लोग संयुक्त राष्ट्र सहित अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में तेजी से विश्वास खो रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और मानवीय मूल्यों का उल्लंघन कर कोई भी युद्ध वास्तव में कभी जीता नहीं जा सकता है।"मीरवाइज ने कश्मीर के लोगों के प्रति अयातुल्ला खामेनेई के स्नेह को याद करते हुये उनकी कश्मीर की ऐतिहासिक यात्रा और दिवंगत मीरवाइज मौलवी मुहम्मद फारूक के साथ ऐतिहासिक जामा मस्जिद में शुक्रवार की नमाज अदा करने को याद किया। उन्होंने मुस्लिम एकता को बढ़ावा देने में दिवंगत नेता की भूमिका की सराहना की।

कश्मीर की पहचान और संस्कृति पर बोलते हुये मीरवाइज ने क्षेत्र की अनूठी भाषा और परंपराओं को संरक्षित करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वे वर्तमान समय में गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

उर्दू के संबंध में चिंताओं का उल्लेख करते हुये उन्होंने खेद व्यक्त किया कि उर्दू भाषा को केवल इसलिए धार्मिक चश्मे से देखा जा रहा है क्योंकि मुख्य रूप से मुसलमान इसे बोलते हैं। उन्होंने कहा, "सभी भाषाएं सम्मान और मान्यता की पात्र हैं, और भाषाओं का राजनीतिकरण या सांप्रदायिकीकरण करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है तथा समाज के मिले-जुले सांस्कृतिक लोकाचार के लिए हानिकारक है।"मीरवाइज ने कहा कि मुत्ताहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) के बैनर तले, मुस्लिम जगत के भीतर सभी विचारधाराओं के बीच सांप्रदायिक एकता, पारस्परिक सम्मान और भाईचारे के प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने लोगों से समुदाय के भीतर विभाजन और सांप्रदायिक कलह को बढ़ावा देने वालों से सतर्क रहने का आग्रह किया।

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