नयी दिल्ली , फरवरी 22 -- जलवायु परिवर्तन और देसी की बजाय हाइब्रिड प्रजातियों से आयुर्वेदिक दवाओं का असर कम हो रहा है।

ऋषिकल्प आयुर्वेद के संस्थापक अनुपम ताम्रकर ने रविवार को यहां एक परिचर्चा के दौरान कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय में भी जैव विविधता में गिरावट देखी जा रही है जो पहले जड़ी-बूटियों और जैव विविधता का भंडार हुआ करता था। इसके अलावा जड़ी-बूटियों से प्रचुर नेपाल में भी अब हाइब्रिड प्रजाति के पेड़-पौधों की घुसपैठ से उनसे बने आयुर्वेद की दवाएं पहले जैसी प्रभावकारी नहीं रह गयी हैं।

दूसरे भारत-नेपाल व्यापार मेले में दोनों देशों के युवा वर्गों के बीच संबंधों, स्वास्थ्य और शिक्षा में साझेदारी विषय पर आयोजित परिचर्चा में उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि नेपाली केले को बहुत गुणकारी माना जाता है। एक केला खा लेने से पेट पूरी तरह भर जाता है जो उसके औषधीय गुणों के कारण होता है। लेकिन अब भारत से केला वहां जाता है। भारत से पौधे भी वहां जाते हैं, और वहां अब देसी केला कम मिलने लगा है तथा हाइब्रिड केले की उपलब्धता बढ़ गयी है।

श्री ताम्रकर ने कहा, "जब शुद्ध जड़ी-बूटियां ही उपलब्ध नहीं होंगी तो दवाओं का असर कम होता है। फिर लोग कहते हैं कि आयुर्वेद की दवाएं असर नहीं करती हैं।"जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में खेल एवं शारीरिक शिक्षा के निदेशक विक्रम सिंह ने कहा कि आयुर्वेद के अनुसंधान शहरों में नहीं गांवों में होने चाहिये। भारत की तकनीक और शोध क्षमता तथा नेपाल के आंकड़े मिलकर दोनों देशों के लिए संभावनाओं के द्वार खोल सकते हैं। उन्होंने स्कूली स्तर पर ही योग और आयुर्वेद समेत सभी परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों को शामिल किये जाने पर जोर दिया।

श्री सिंह ने कहा कि गांवों से पलायन रोकने के लिए सरकार की पहल या किसी नीति का इंतजार किये बिना एक व्यक्ति भी बदलाव ला सकता है। इसके लिए एक ऐसा पारितंत्र तैयार करने की जरूरत है जो गांव को अपनी जरूरतों को स्थानीय स्तर पर ही पूरी करने में सक्षम बनाता हो।

आयुर्वेद में महिला रोग विशेषज्ञ सुभद्रा कारकी ने बताया कि नेपाल, भारत या दुनिया के किसी भी देश में जीवन के हर पड़ाव पर महिलाओं के लिए अलग-अलग पारंपरिक खान-पान हैं। इनके पीछे वैज्ञानिक कारण हैं। यहां तक कि मौसम के हिसाब से भी खान-पान बदल जाता है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के ज्ञान के साथ आधुनिक चिकित्सा पद्धति की भी अच्छी बातों को शामिल किया जाना चाहिये।

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