बिलासपुर , अक्टूबर 15 -- छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रेंज साइबर पुलिस ने 'च्वाइस सेंटर' संचालकों के क्यूआर कोड का इस्तेमाल कर साइबर ठगी की रकम के बदले नकदी हासिल करने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए रायपुर के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने गुरुवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने प्रदेश के नौ जिलों में करीब 45 च्वाइस सेंटर संचालकों को निशाना बनाया। प्रारंभिक जांच में धोखाधड़ी की रकम 20 से 25 लाख रुपये के बीच होने का अनुमान है।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रायपुर निवासी अंकित आहूजा (32) और आशीष केवटवानी (32) के रूप में हुई है। दोनों के कब्जे से एक लाख दो हजार रुपये नकद, वारदात में इस्तेमाल एक बलेनो कार, एक स्कूटी और दो मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 317(4) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह की गतिविधियों का खुलासा बिलासपुर जिले के बिल्हा मोड़ स्थित लक्ष्मी च्वाइस सेंटर के संचालक देवेंद्र रजक की शिकायत के बाद हुआ। शिकायत में बताया गया कि पांच अक्टूबर को दोपहर करीब 12.38 बजे बलेनो कार से एक व्यक्ति उनके सेंटर पहुंचा था। उसने फोन-पे के माध्यम से रकम भेजने के बदले नकद भुगतान प्राप्त करने की बात कही। संचालक के सहमत होने पर उसने सेंटर के क्यूआर कोड की तस्वीर मोबाइल से ली और वहां से चला गया।
इसके बाद संबंधित क्यूआर कोड के माध्यम से 16 हजार रुपये का लेन-देन किया गया और संचालक ने उसके बदले नकद राशि का भुगतान कर दिया। हालांकि, अगले दिन संचालक के बैंक खाते पर रोक लगा दी गई। बैंक से संपर्क करने पर जानकारी मिली कि उनके फोन-पे खाते में साइबर धोखाधड़ी से संबंधित रकम आने के कारण खाता होल्ड किया गया है।
इस घटना के बाद देवेंद्र रजक को च्वाइस सेंटर संचालकों के वाट्सऐप समूह से पता चला कि इसी तरीके से अन्य संचालकों के साथ भी धोखाधड़ी की गई है। शिकायत मिलने पर रेंज साइबर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपियों की पहचान के लिए विशेष टीम गठित की।
जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि अंकित आहूजा हिर्री और बिल्हा क्षेत्र में दोबारा इसी तरह की वारदात को अंजाम देने के प्रयास में घूम रहा है। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में उसने अपने साथी आशीष केवटवानी के साथ मिलकर वारदातों को अंजाम देने की बात स्वीकार की। इसके बाद पुलिस ने दूसरे आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों आरोपियों ने धोखाधड़ी के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां तय कर रखी थीं। अंकित आहूजा च्वाइस सेंटर और कॉमन सर्विस सेंटर पहुंचकर संचालकों के क्यूआर कोड की तस्वीर अपने मोबाइल से लेता था और उसे आशीष केवटवानी को भेज देता था। इसके बाद आशीष संबंधित क्यूआर कोड के जरिए रकम का लेन-देन करता था, जबकि अंकित सेंटर संचालकों से उसके बदले नकद राशि लेकर चला जाता था।
पुलिस के अनुसार, इस प्रक्रिया में साइबर अपराध से संबंधित रकम च्वाइस सेंटर संचालकों के खातों में पहुंचती थी। बाद में संदिग्ध लेन-देन के कारण बैंक खातों पर रोक लगने से संचालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। कई संचालकों को खाता होल्ड होने के बाद ही धोखाधड़ी का पता चला।
अब तक की जांच में बिलासपुर, रायपुर, महासमुंद, बलौदाबाजार, कोरबा, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, सक्ती और दुर्ग जिले में इस तरह की घटनाओं की जानकारी सामने आई है। पुलिस को करीब 45 पीड़ित च्वाइस सेंटर संचालकों के आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन शिकायतों के आधार पर कुल 20 से 25 लाख रुपये की धोखाधड़ी होने का अनुमान लगाया गया है।
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