मुंबई , जून 14 -- फिल्म चंदू चैंपियन को रिलीज़ हुए दो साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन यह फिल्म आज भी भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर की प्रेरणादायक कहानी को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए याद की जाती है। कबीर खान के निर्देशन में बनी और साजिद नाडियाडवाला द्वारा निर्मित इस स्पोर्ट्स ड्रामा में कार्तिक आर्यन ने मुरलीकांत पेटकर का किरदार निभाया था। फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से भरपूर सराहना मिली थी और कार्तिक आर्यन के अभिनय को उनके करियर की सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियों में से एक माना गया।
फिल्म की रिलीज़ के दो साल पूरे होने के अवसर पर दिए गए एक हालिया इंटरव्यू में मुरलीकांत पेटकर ने फिल्म के प्रभाव और कार्तिक आर्यन की मेहनत को याद करते हुए कहा कि इस फिल्म ने उनकी कहानी को देशभर में नई पहचान दिलाई। उन्होंने कहा, "इस फिल्म ने सिर्फ मेरी कहानी नहीं दिखाई, बल्कि उसे लाखों लोगों तक पहुंचाया। पहले बहुत कम लोग मेरी यात्रा या भारत के पैरालंपिक इतिहास के बारे में जानते थे, लेकिन आज कई लोग मुझसे मिलकर बताते हैं कि इस फिल्म ने उन्हें प्रेरित किया है और कठिन परिस्थितियों में संघर्ष करने की ताकत दी है।"पेटकर ने कहा कि फिल्म ने लोगों को यह समझने में मदद की कि सफलता केवल पदक जीतने का नाम नहीं है, बल्कि उसके पीछे वर्षों की मेहनत, त्याग और संघर्ष छिपा होता है। उन्होंने कहा कि उनकी कहानी को जिस तरह बड़े पर्दे पर प्रस्तुत किया गया, उससे पैरा-एथलीट्स के प्रति लोगों की सोच में भी सकारात्मक बदलाव आया है।
उन्होंने कहा, "पहले पैरा-एथलीट्स को अक्सर सहानुभूति की नजर से देखा जाता था, लेकिन अब सम्मान और प्रशंसा का भाव बढ़ रहा है। लोग समझने लगे हैं कि पैरा-एथलीट्स भी उतनी ही मेहनत, समर्पण और साहस के साथ खेलते हैं जितना कोई अन्य खिलाड़ी। यह बदलाव देखना मेरे लिए बेहद संतोषजनक है।"कार्तिक आर्यन की भूमिका के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए मुरलीकांत पेटकर ने कहा कि कार्तिक ने इस किरदार को निभाने के लिए असाधारण मेहनत की थी। उन्होंने कहा, "कार्तिक आर्यन अपनी मेहनत और समर्पण के लिए नेशनल अवॉर्ड डिज़र्व करते हैं। यह सिर्फ एक अभिनेता द्वारा कोई किरदार निभाने की बात नहीं थी, बल्कि उन्होंने इस भूमिका को पूरी तरह जिया। उन्होंने मेरी कहानी को पूरे सम्मान और संवेदनशीलता के साथ पर्दे पर उतारा।"पेटकर ने आगे कहा कि कार्तिक ने उनकी जिंदगी के भावनात्मक पहलुओं को भी बेहद ईमानदारी से चित्रित किया। उन्होंने कहा, "कार्तिक ने इसे सिर्फ उपलब्धियों की कहानी की तरह नहीं दिखाया, बल्कि संघर्ष, आत्म-संदेह, गुस्सा, दर्द और दृढ़ निश्चय जैसे पहलुओं को भी उतनी ही संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया, जो मेरी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। जिस बात ने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया, वह थी इस किरदार के प्रति उनकी ईमानदारी।"उन्होंने कहा कि किसी भी जीवित व्यक्ति की कहानी को पर्दे पर उतारना आसान नहीं होता, क्योंकि उसमें तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी सही तरीके से प्रस्तुत करना होता है। कार्तिक ने इस चुनौती को बखूबी निभाया और दर्शकों को यह महसूस कराया कि वे केवल एक खिलाड़ी की कहानी नहीं देख रहे, बल्कि एक ऐसे इंसान की यात्रा का अनुभव कर रहे हैं जिसने तमाम कठिनाइयों के बावजूद हार नहीं मानी।
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