बैतूल , जून 29 -- भारत सरकार के 'खेत बचाओ अभियान' के तहत मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में किसानों को प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से प्रशिक्षण कार्यक्रम और ग्राम चौपाल का आयोजन किया गया।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार आमला विकासखंड के ग्राम रमली में प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा भैंसदेही में ग्राम चौपाल आयोजित कर किसानों को खरीफ फसलों में वैज्ञानिक खेती के तरीकों की जानकारी दी गई।

भारत सरकार के दलहन निदेशालय के तकनीकी अधिकारी सरजू पल्लेवार ने कहा कि अभियान का उद्देश्य किसानों की उत्पादन लागत कम करना, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना तथा जलवायु अनुकूल प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है। उन्होंने खरीफ सीजन में सोयाबीन, मक्का, उड़द, मूंग और अरहर जैसी फसलों में संतुलित उर्वरकों के उपयोग तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की सलाह दी।

कृषि विज्ञान केंद्र बैतूल बाजार के वैज्ञानिक डॉ. मुरली इंगले ने मृदा परीक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मिट्टी की जांच के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करने से लागत घटती है, उत्पादन बढ़ता है और भूमि की उर्वरता बनी रहती है। परियोजना संचालक आत्मा सुरेंद्र कुमार परहाते ने किसानों को फसल विविधीकरण, फसल चक्र और प्राकृतिक खेती के लाभों की जानकारी देते हुए टिकाऊ कृषि के लिए संतुलित पोषक तत्वों के उपयोग पर जोर दिया।

ग्राम भैंसदेही में तकनीकी अधिकारी सरजू पल्लेवार ने किसान राम टिकमें के प्राकृतिक खेती प्रक्षेत्र का भ्रमण किया। इस दौरान कृषि सीआरपी राधा नारे ने प्राकृतिक खेती के अंतर्गत संचालित गतिविधियों और राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत तैयार किए जा रहे जैविक उत्पादों की जानकारी दी। चौपाल में किसानों ने अंतरवर्ती शस्य क्रिया और खरपतवार नियंत्रण के लिए मानव चालित तथा पावर चालित कृषि यंत्र अनुदान पर उपलब्ध कराने की मांग भी की।

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