नयी दिल्ली , अप्रैल 02 -- केंद्र सरकार के 'मिशन कर्मयोगी' के तहत राष्ट्रीय शिक्षण पहल 'कर्मयोगी साधना सप्ताह' का शुभारंभ गुरुवार को यहां डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में हुआ।

देशभर में दो से आठ अप्रैल तक चलने वाले इस कार्यक्रम में सरकारी कर्मचारियों की क्षमता, प्रतिबद्धता और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण को सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में शासन को नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप ढलना होगा और "नागरिक देवो भव" की भावना से प्रेरित रहना होगा।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा ने कहा कि 'साधना सप्ताह' एक सक्षम, समर्पित और नागरिक-केंद्रित सिविल सेवा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि अब क्षमता निर्माण पारंपरिक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आईगॉट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म के माध्यम से यह 'कभी भी, कहीं भी' सीखने की प्रणाली बन चुका है।

उन्होंने कहा कि नियम-आधारित शासन से भूमिका-आधारित शासन की ओर बदलाव पर जोर देते हुए कहा कि आज के दौर में तकनीक, जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए नई क्षमताओं की आवश्यकता है।

क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान ने कहा कि यह पहल 'मिशन कर्मयोगी' की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो सार्वजनिक सेवा में ज्ञान, कौशल और मूल्यों को एकीकृत करने का काम कर रही है।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की सचिव रचना शाह वहीं, रचना शाह ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में इस मिशन के तहत 1.5 करोड़ से अधिक शिक्षार्थी पंजीकृत हुए हैं और 8 करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं। प्लेटफॉर्म पर 4,600 से अधिक कोर्स कई भाषाओं में उपलब्ध हैं।

'कर्मयोगी भारत' के अध्यक्ष सुब्रमण्यम रामादोराई ने कहा कि यह पहल सिविल सेवाओं में निरंतर सीखने और आत्म-सुधार की संस्कृति को मजबूत करती है और उभरती तकनीकों, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को बढ़ावा देती है।

कार्यक्रम के दौरान कई नयी पहलें भी शुरू की गईं, जिनमें 'कर्मयोगी कर्तव्य कार्यक्रम', 'कर्मयोगी क्षमता कनेक्ट' और एआई आधारित 'केस स्टडी सूट' शामिल हैं। इनका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को आधुनिक कौशल से लैस करना और सेवा वितरण को अधिक प्रभावी बनाना है।

सरकार के अनुसार, 'मिशन कर्मयोगी' ने पांच वर्षों में नियम-आधारित व्यवस्था से योग्यता-आधारित ढांचे की ओर बदलाव लाकर सिविल सेवाओं में संरचनात्मक सुधार किया है। 'कर्मयोगी साधना सप्ताह' इसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने में सहायक होगा।

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