मुंबई , अक्टूबर 27 -- बॉम्बे उच्च न्यायालय ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े एक विवादित सोशल मीडिया पोस्ट को रीपोस्ट करने के मामले में पुणे की 20 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्रा के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के दौरान छात्रा पर एक विवादित इंस्टाग्राम पोस्ट साझा करने का आरोप था, जिसके चलते उसे गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि छात्रा के बर्ताव को पूरे संदर्भ में देखा जाना चाहिए। इसमें यह भी ध्यान रखा गया कि सामग्री साझा करने में उसकी भूमिका सीमित थी, उसने जल्द ही उस पोस्ट को हटा दिया था और बाद में माफी भी मांग ली थी।
न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव की एकलपीठ ने कहा कि युवाओं को अपनी गलतियों से सीखने का मौका मिलना चाहिए, खासकर तब जब यह घटना कोई एक बार की बात लगे। पीठने यह भी गौर किया कि छात्रा को हिरासत में रहना पड़ा था, जो उसके वयस्क जीवन की शुरुआत में एक ऐसा अनुभव है जिसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। यह मामला 7 मई, 2025 को 'रिफॉर्मिस्तान' नाम के एक अकाउंट से की गई इंस्टाग्राम रीपोस्ट से जुड़ा था। उस सामग्री में भारत सरकार पर आरोप लगाया गया था कि उसने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ टकराव को उकसाया है। धमकियों का सामना करने के बाद छात्रा ने लगभग दो घंटे के भीतर ही पोस्ट को हटा दिया और बाद में माफी भी मांगी।
अदालत ने इस बात पर विशेष ध्यान दिया कि विवादित सामग्री खुद बनाने और पहले से ऑनलाइन मौजूद सामग्री को साझा करने के बीच अंतर होता है। छात्रा ने मूल पोस्ट नहीं लिखी थी और न्यायाधीश ने उसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करते समय इसे एक महत्वपूर्ण कारक माना।
पीठ ने माना कि सामग्री में संवेदनशील धार्मिक मुद्दे शामिल थे, जिससे समुदायों के बीच तनाव बढ़ सकता था।पीठ ने जोर दिया कि केवल जनता के गुस्से या नाराजगी के आधार पर किसी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
अधिकारियों को यह साबित करना होगा कि किया गया काम कानून की संबंधित धाराओं के दायरे में आता है। न्यायाधीश ने पोस्ट हटाने से जुड़ी परिस्थितियों को भी अहम माना। आदेश के अनुसार छात्रा ने जांचकर्ताओं के कहने पर नहीं बल्कि अपनी मर्जी से उस सामग्री को हटाया था। अदालत ने यह भी देखा कि उसने बाद में पछतावा जताया था। इससे यह समझने में मदद मिली कि क्या इस घटना के पीछे धार्मिक नफरत या दुश्मनी को बढ़ावा देने का कोई इरादा था। छात्रा ने आपराधिक मामले को रद्द कराने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
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