श्रीगंगानगर , अक्टूबर 22 -- राजस्थान में श्रीगंगानगर जिला प्रशासन द्वारा 22 से 26 अक्टूबर तक आयोजित पांच दिवसीय श्रीगंगानगर स्थापना दिवस समारोह का भव्य समापन 26 अक्टूबर को सूरतगढ़ में 'एक शाम धोरों के नाम' कार्यक्रम के साथ होगा।

आधिकारिक सू्त्रों ने गुरुवार को बताया कि खेजड़ी मंदिर के रेतीले धोरों पर अपराह्न चार बजे से रात साढ़े आठ बजे तक चलने वाले इस आयोजन में ऊंट सफारी, ऊंट गाड़ा सफारी, जीप सफारी, ऊंट नृत्य और राजस्थान के विभिन्न अंचलों की लोक कला-सांस्कृतिक प्रस्तुतियां मुख्य आकर्षण रहेंगी।

सूत्रों ने बताया कि इस कार्यक्रम के जरिए क्षेत्र की रेगिस्तानी जीवनशैली, पारंपरिक कलाओं और सांस्कृतिक विरासत को एक साथ जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों ने खेजड़ी मंदिर के रेतीले धोरों का निरीक्षण करके आयोजन की तैयारियों का जायजा लिया है और संबंधित विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी हैं।

श्रीगंगानगर का आधुनिक निर्माण 26 अक्टूबर 1927 को पंजाब से गंगनहर (बीकानेर नहर के रूप में भी प्रसिद्ध) में पहली बार पानी छोड़ने के साथ जुड़ा हुआ है। उस दिन तत्कालीन बीकानेर रियासत के महाराजा गंगासिंह और अन्य गणमान्य लोगों की उपस्थिति में नहर में पानी छोड़ा गया था। इसी ऐतिहासिक घटना को श्रीगंगानगर शहर के आधुनिक विकास की आधारशिला माना जाता है और पिछले करीब 25 वर्षों से 26 अक्टूबर को स्थापना दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। वर्ष 2027 श्रीगंगानगर के आधुनिक निर्माण का शताब्दी वर्ष होगा। इस अवसर पर वर्ष भर कई विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित