नैनीताल , मई 12 -- उत्तराखंड के नैनीताल के खुर्पाताल स्थित डायनेस्टी रिसार्ट के मामले में उच्च न्यायालय ने मंगलवार को सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं दी।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में आज डायनेस्टी रिसार्ट के मामले में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) की ओर 28 अप्रैल को एक आदेश जारी कर डायनेस्टी रिसार्ट को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से पीसीबी के आदेश पर रोक लगाने की मांग करते हुए यह भी कहा गया कि खूर्पाताल को लेकर याचिका उच्च न्यायालय में लंबित है ऐसे में पीसीबी का यह कदम अनुचित है। बोर्ड ने उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन उचित समय पर नहीं किया गया है।

दूसरी ओर पीसीबी की ओर से खंडपीठ को बताया गया कि ललित मिगलानी बनाम राज्य सरकार मामले में दायर जनहित याचिका के क्रम में उच्च न्यायालय ने खुर्पाताल क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम का उल्लंघन करने वाले ने होटल और रिसार्ट के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

आगे कहा गया कि वर्ष 2024 और 2025 में तीन बार रिसार्ट का निरीक्षण किया गया और पाया गया कि रिसार्ट में प्रदूषण नियंत्रण मानकों का अनुपालन उचित ढंग से नहीं किया जा रहा है।

सीवरेज का उचित निस्तारण नहीं किया जा रहा है। कूड़ा अथवा ठोस अपशिष्ट का प्रबंधन नियमानुसार नहीं किया जा रहा है। कूड़ा रिसार्ट परिसर के पास जलाया जा रहा है। इस आशय की रिपोर्ट खंडपीठ के समक्ष सौंपी गई जिसमें फोटो भी संलग्न किये गये थे।

पीसीबी की ओर से यह भी कहा गया कि पीसीबी की एक टीम प्रशासन, पुलिस कर्मियों और बिजली महकमे के अधिकारियों के साथ सोमवार को डायनेस्टी रिसार्ट गई थी लेकिन रिसार्ट में 44 कमरों में पर्यटक ठहरे हुए थे। इसलिए बंदी कार्रवाई नहीं की जा सकी।

इस संबंध में रिपोर्ट अदालत में सौंपी गई। यह भी कहा गया कि पीसीबी की संयुक्त टीम आज मौके पर गई होगी और बंदी कार्रवाई की गयी होगी।

अंत में खंडपीठ ने सभी तथ्यों को देखने और सुनने के बाद याचिकाकर्ता को कोई राहत देने से इन्कार कर दिया और पीसीबी के 28 अप्रैल के नोटिस रोक लगाने से इनकार कर दिया। साथ ही याचिका को पूरी तरह से निस्तारित कर दिया है।

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