चंडीगढ़ , मई 30 -- हरियाणा के पर्यटन एवं विरासत मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा है कि विरासत केवल पुराने भवनों और स्मारकों तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपराओं और पहचान का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से अपनी ऐतिहासिक धरोहरों को जानने, समझने और उनके संरक्षण में योगदान देने का आह्वान किया।
सोनीपत में हरियाणा पर्यटन निगम द्वारा आयोजित हैरिटेज एवं सिटी वॉक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए डॉ. शर्मा ने शनिवार को कहा कि नियमित पैदल चलना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है और जब यह यात्रा अपनी विरासत से जुड़ जाती है तो इसका महत्व और बढ़ जाता है। यह वॉक एथनिक इंडिया, राई से शुरू होकर ऐतिहासिक बड़खालसा मेमोरियल तक निकाली गई, जिसमें सैकड़ों युवाओं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और नागरिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का आयोजन 'आओ चलें अपनी विरासत के साथ' अभियान के तहत किया गया।
विधायक पवन खरखौदा ने कहा कि हरियाणा गौरवशाली इतिहास और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की भूमि है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपने इतिहास और महान व्यक्तित्वों के बारे में जानने का अवसर मिलता है। उन्होंने विरासत स्थलों के संरक्षण को समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बताया।
वॉक के समापन पर प्रतिभागियों को बड़खालसा मेमोरियल के इतिहास की जानकारी दी गई। बताया गया कि वर्ष 1675 में श्री गुरु तेग बहादुर जी का पावन शीश दिल्ली से आनंदपुर साहिब ले जाते समय मुगल सेना पीछा कर रही थी। उस समय बड़खालसा के वीर दादा कुशाल सिंह दहिया ने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए अपना शीश बलिदान कर दिया, जिससे गुरु जी का पावन शीश सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंच सका।
इस अवसर पर डॉ. शर्मा ने दादा कुशाल सिंह दहिया की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि उनका बलिदान भारतीय इतिहास का गौरवशाली अध्याय है और आने वाली पीढ़ियों को साहस, त्याग तथा राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा।
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