अमृतसर , जून 05 -- श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने शुक्रवार को कहा कि ब्रिटेन के युवक हेनरी नोवाक की हत्या के मामले में ब्रिटेन की अदालत द्वारा आरोपी विक्रम सिंह दिगवा को कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए, लेकिन इस घटना के आधार पर पूरी सिख कौम को निशाना बनाना, सिखों के धार्मिक प्रतीक किरपान पर प्रतिबंध लगाने की मांग करना और नफरत की राजनीति करना एक गहरी साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है।

जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि ब्रिटेन की न्यायिक प्रक्रिया ने आरोपी को उसके धर्म के आधार पर कोई विशेष छूट नहीं दी और कानून के अनुसार न्याय किया गया, जिसका सिख समुदाय भी सम्मान करता है। कुछ तत्व हालांकि इस घटना को आधार बनाकर विदेशों में सिखों की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने ब्रिटेन की सभी सिख संस्थाओं और संगठनों से अपील की कि वे हेनरी नोवाक के परिवार के साथ खड़े हों और इस कठिन समय में उनका सहयोग करें। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के प्रमुख सिखों से मिली जानकारी के अनुसार हत्या में जिस हथियार का इस्तेमाल किया गया, वह पेश-कब्ज (फारसी खंजर) था, न कि सिख धर्म का प्रतीक किरपान। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिख परंपरा में किरपान का उद्देश्य कमजोर और पीड़ितों की रक्षा करना तथा न्याय की स्थापना करना है, न कि किसी के खिलाफ हिंसा या अन्याय करना। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में सिख समुदाय शांतिप्रिय, कानून का पालन करने वाला और मानवता की सेवा के लिए समर्पित समुदाय के रूप में जाना जाता है।

जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि सिख समुदाय प्रतिदिन अपनी अरदास में 'सरबत दा भला' की कामना करता है और मानव सेवा के कारण विश्वभर में सम्मान प्राप्त कर चुका है। उन्होंने याद दिलाया कि सिखों और ब्रिटेन के संबंध लगभग 200 वर्ष पुराने हैं तथा विश्व युद्धों से लेकर देश के विकास तक सिखों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग राजनीतिक लाभ के लिए एक व्यक्ति की गलती को पूरी सिख कौम से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने ब्रिटेन सरकार, विभिन्न समुदायों और सिख समाज से आपसी भाईचारा बनाये रखने तथा नफरत फैलाने वाले तत्वों की पहचान करने की अपील की।

जत्थेदार ने ब्रिटेन सरकार से ऐसे लोगों और संगठनों पर नजर रखने की मांग की, जो सामाजिक और सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही मीडिया और सोशल मीडिया मंचों से भी अपील की कि वे इस मामले से जुड़ी खबरें तथ्यों और सच्चाई के आधार पर प्रकाशित करें, न कि किसी समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने के उद्देश्य से।

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