हैदराबाद , सितंबर 17 -- उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने गुरुवार को कहा कि हैदराबाद मुक्ति दिवस आज़ाद भारत के इतिहास में एक अहम अध्याय है और यह देश के राजनीतिक एकीकरण से लेकर संवैधानिक लोकतंत्र तक के सफर को दिखाता है।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की ओर से सिकंदराबाद के परेड ग्राउंड में आयोजित 79वें हैदराबाद मुक्ति दिवस को संबोधित करते हुए श्री राधाकृष्णन ने कहा कि सितंबर 1948 में ऑपरेशन पोलो के बाद पहले का हैदराबाद राज्य भारतीय संघ में शामिल हो गया था। तेरह सितंबर को शुरू हुआ यह ऑपरेशन 17 सितंबर को निज़ाम की सेना के आत्मसमर्पण के साथ खत्म हुआ।
उन्होंने कहा कि केंद्र 2022 से यह दिन उन लोगों को सम्मान देने के लिए मना रहा है जिन्होंने हैदराबाद की आज़ादी और एकीकरण के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी और कम जाने-पहचाने हीरो की कहानियों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाया।
उपराष्ट्रपति ने रियासतों के एकीकरण में सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका को याद करते हुए कहा कि उनके पक्के इरादे, राजनीतिक समझ और नेतृत्व ने एक मज़बूत और एकजुट भारत की नींव रखी। उन्होंने ऑपरेशन पोलो के दौरान भारतीय सेना और जोधपुर लांसर्स के योगदान को भी माना।
श्री राधाकृष्णन ने कहा कि हैदराबाद मुक्ति संग्राम भी एक जन आंदोलन था जिसमें छात्रों, बुद्धिजीवियों, लेखकों और आम नागरिकों ने मुश्किलें झेलीं और कुर्बानियां दीं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता सिर्फ़ भूगोल से नहीं बनी रह सकती और इसे हर नागरिक के लिए समान अधिकार, सम्मान और मौकों के ज़रिए मज़बूत करना होगा। उन्होंने ज़ोर दिया कि भारतीय अलग-अलग भाषाएं, परंपराएं, धर्म और राजनीतिक राय मान सकते हैं, लेकिन वे संविधान और इस सिद्धांत से एकजुट हैं कि संप्रभुता आखिरकार लोगों के पास है।
उपराष्ट्रपति ने कोमाराम भीम और दूसरे कम जाने-पहचाने हीरो समेत शहीदों और आज़ादी के दीवानों को श्रद्धांजलि दी और लोगों से उनके बलिदान से प्रेरणा लेने और 2047 तक एक विकसित भारत बनाने में योगदान देने की अपील की।
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