रांची , फरवरी 20 -- झारखंड में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने राज्य में हेपेटाइटिस-बी के संक्रमण को जड़ से मिटाने और मां से बच्चे में होने वाले प्रसार को रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

श्री झा ने आज सभी जिलों नोडल पदाधिकारी और जिला आरसीएचओ को निर्देश दिए हैं कि राज्य के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में गर्भवती महिलाओं की हेपेटाइटिस-बी जांच शत-प्रतिशत अनिवार्य होगी साथ ही जांच की एंट्री एमसीपी कार्ड में भी आवश्यक रूप से दर्ज किया जाना अनिवार्य है।

श्री झा ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि प्रसव केंद्रों के लेबर रूम में हेपेटाइटिस-बी की 'बर्थ डोज' के साथ-साथ इम्यूनोग्लोबुलिन टीका हर समय उपलब्ध रहे। यदि कोई माँ पॉजिटिव पाई जाती है, तो उसके नवजात को जन्म के 24 घंटे के भीतर ये दोनों टीके लगाना अनिवार्य होगा। इसके लिए मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लेबर रूम में टीकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।

वर्टिकल ट्रांसमिशन को रोकने के लिए यह 'गोल्डन 24 घंटे' बेहद महत्वपूर्ण हैं। विभाग ने इसके लिए वार्षिक लक्ष्य भी निर्धारित किए हैं, जिन्हें भारत सरकार के 'की-डिलिवरेबल' के रूप में चिन्हित किया गया है। आंकड़ों की पारदर्शिता के लिए गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग और शिशुओं के टीकाकरण की रिपोर्टिंग केंद्र सरकार के आरसीएच पोर्टल पर अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस अभियान के प्रभावी संचालन के लिए रिम्स, रांची को मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर के रूप में चिन्हित किया गया है, जबकि सभी जिला अस्पतालों और पांच मेडिकल कॉलेजों को ट्रीटमेंट सेंटर के रूप में सक्रिय किया गया है।

ज्ञातव्य हो कि इस कार्यक्रम की सफलता के लिए हाल ही में 19 से 22 जनवरी तक राज्य स्तरीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का आयोजन भी किया गया था, जिसमें विशेषज्ञों द्वारा जिला स्तरीय अधिकारियों और चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया गया है। यह कदम सतत विकास लक्ष्यों को समय पर पूरा करने की दिशा में उठाया गया है।

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