कोलकाता , मई 11 -- पश्चिम बंगाल में जनता उन्नयन पार्टी के विधायक हुमायूं कबीर ने बेलडांगा-2 पंचायत समिति के कार्यालय में ताला लगाते हुए आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) शासन के दौरान सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ था।

श्री कबीर हाल ही में हुए 2026 के विधानसभा चुनावों में रेजिनगर और नौदा दोनों विधानसभा क्षेत्रों से जीते हैं। उन्होंने टीएमसी के नेतृत्व वाली पंचायत संस्था 'परायण समाधान' कार्यक्रम के तहत लगभग 28 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाया।

विधायक ने यह दावा करते हुए कि विकास कार्यों को लागू करने में भारी अनियमितताएं हुई हैं, कार्यालय के दरवाजे पर ताले लगा दिए और चाबियां छीन लीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक सही जांच नहीं हो जाती, कोई भी आधिकारिक काम जारी नहीं रहना चाहिए।

इस घटना से बेलडांगा-2 पंचायत समिति के कार्यालय और उससे सटे प्रखंड विकास कार्यालय परिसर में और उसके आसपास बहुत तनाव फैल गया। नये चुने गये विधायक के बड़ी संख्या में समर्थक कार्यालय परिसर के बाहर जमा हो गए, जबकि स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए हालात पर करीब से नजर रखे हुए थे।

श्री कबीर ने बेलडांगा-2 प्रखंड के प्रखंड विकास अधिकारी को एक आवेदन देने के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए आरोप लगाया कि पिछली सरकार में भ्रष्टाचार संस्थाबद्ध हो गया था। उन्होंने दावा किया कि गरीब गांववालों को आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लिए जमीन के पट्टे पाने के लिए 2 लाख से 5 लाख रुपये देने के लिए मजबूर किया जाता था।

श्री कबीर ने आरोप लगाया, "जमीन का अधिकार देने के नाम पर गरीबों को लूटा गया। उन मजबूर लोगों से पैसे वसूले गए जिन्हें सरकारी फायदे मुफ्त में मिलने चाहिए थे।" विधायक ने शक्तिपुर थाना प्रभारी पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनके मुताबिक, प्रशासनिक शक्ति का गलत इस्तेमाल करके करीब 70 लाख रुपये की मिट्टी गैर-कानूनी तरीके से बेची गई और पूरी रकम हड़प ली गई। कबीर ने दावा किया कि दोनों आरोपों के बारे में अधिकारियों को पहले ही लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं।

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