नयी दिल्ली , मार्च 27 -- हिमालय क्षेत्र के ग्लेशियरों के पिघलने का मुद्दा शुक्रवार को लोकसभा में उठा और इससे निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाने की सरकार से मांग की गई।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाया और कहा कि हिमालय, जिसे एशिया का जल स्रोत कहा जाता है, आज जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से तेजी से प्रभावित हो रहा है। विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार पिछले कुछ दशकों में हिमालय ग्लेशियरों का क्षेत्रफल लगभग 15 से 20 प्रतिशत कम हुआ है और कई छोटे ग्लेशियर तेजी से विलुप्त होने की स्थिति में है। विशेष रूप से उत्तराखंड क्षेत्र में स्थिति अधिक चिंताजनक है।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की रियल टाइम सैटेलाइट एवं ग्राउंड आधारित मॉनिटरिंग को सुधार किया जाए और उच्च जोखिम वाली झीलों के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाए। इसके साथ ही ग्लेशियर के संकुचन पर दीर्घकालिक वैज्ञानिक अध्ययन हो और उसके डाटा संग्रहण को ज्यादा मजबूत किया जाये।

श्री रावत ने कहा कि हिमालय राज्यों के लिए एक समग्र जलवायु अनुकूलन एवं आपदा प्रबंधन नीति बने और इसने स्थानीय निवासियों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए आपदा निवारण प्रक्रिया को सुदृढ किया जाये।

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