शिमला , अक्टूबर 9 -- हिमाचल प्रदेश में चालू सेब सीजन के दौरान प्रतिकूल मौसम के कारण पैदावार प्रभावित होने के बावजूद राज्य सरकार ने बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) के तहत अब तक 13,202.666 टन सेब की खरीद की है।

बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने शुक्रवार को यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बताया कि फसल के विकास के महत्वपूर्ण चरणों में असमय बारिश, फूल आने के समय अत्यधिक ठंड और सही मौसम की कमी के कारण इस वर्ष सेब पैदावार पर विपरीत असर पड़ा है। उन्होंने बताया कि चालू सीजन में अब तक 1,23,34,739 सेब के बॉक्स मंडियों तक पहुंचे हैं, और हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम और हिमफेड से एमआईएस के तहत खरीद प्रक्रिया जारी है।

पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए बागवानी मंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता योजना को लेकर किसानों और बागवानों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार को पिछली सरकार से 114 करोड़ रुपये की एमआईएस देनदारियां विरासत में मिली थीं, जिन्हें न केवल चुका दिया गया है बल्कि वर्तमान सरकार ने अब तक किसानों और बागवानों को 262 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान भी किया है।

उन्होंने कहा कि सरकार की 'व्यवस्था परिवर्तन' पहल के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से एमआईएस के तहत पंजीकरण की पुरानी व्यवस्था को बदलकर आवेदन आधारित प्रणाली लागू की गई है। इस नयी व्यवस्था से पारदर्शिता में सुधार हुआ है और फर्जी या दोहराव वाले पंजीकरणों में कमी आई है।

भुगतान का ब्योरा साझा करते हुए श्री नेगी ने बताया कि योजना के तहत 30 बैग से कम सेब बेचने वाले 11,285 बागवानों और 100 बैग से कम बेचने वाले 2,827 बागवानों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधी राशि भेजी जा चुकी है। इसके अतिरिक्त 100 बैग से अधिक बेचने वाले लगभग 7,000 बागवानों को चिह्नित किया गया है, जिनमें से 2,000 मामलों का सत्यापन पूरा हो चुका है और शेष 5,000 मामलों में राजस्व भूमि रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा रहा है।

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