शिमला , मार्च 09 -- हिमाचल प्रदेश में नगर एवं ग्राम नियोजन (टीसीपी) विभाग ने हिमाचल प्रदेश नगर एवं ग्राम नियोजन (अठारहवां संशोधन) नियम 2026 के जरिए राज्य में रियल एस्टेट और शहरी निर्माण परियोजनाओं के लिए प्रीमियम फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) प्रावधान पेश किया है।

गत 27 फरवरी को जारी दो अधिसूचनाओं को राज्य के गजट में प्रकाशित किया गया है, जिनमें नियोजित शहरी विकास और टिकाऊ निर्माण के उद्देश्य से नये नियम लाये गये हैं।

संशोधित नियमों के तहत अब डेवलपर्स को निर्धारित शुल्क का भुगतान कर सामान्य रूप से स्वीकृत एफएआर से अधिक अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र खरीदने की अनुमति होगी। प्रीमियम एफएआर से आशय यह है कि सरकार को तय रकम के भुगतान पर मानक एफएआर के ऊपर दी गयी अतिरिक्त स्वीकृत फ्लोर एरिया से है। यह तंत्र शहरी बुनियादी ढांचे के लिए राजस्व उत्पन्न करने के साथ-साथ तय क्षेत्रों में उच्च घनत्व वाले निर्माण को सक्षम बनाता है।

अधिसूचना के अनुसार टीसीपी विभाग ने प्रीमियम एफएआर का लाभ उठाने के लिए चरणबद्ध शुल्क संरचना निर्धारित की है। इसके तहत डेवलपर्स 3,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर का भुगतान कर 0.25 तक अतिरिक्त एफएआर प्राप्त कर सकते हैं। 0.25 और 0.50 के बीच एफएआर के लिए शुल्क 5,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर तय किया गया है, जबकि 0.50 और 0.75 के बीच अतिरिक्त एफएआर की लागत 7,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर होगी।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह प्रावधान केवल उन परियोजनाओं पर लागू होगा जिनका निर्माण अभी शुरू होना है या जो वर्तमान में निर्माणाधीन हैं। जिन रियल एस्टेट परियोजनाओं को पहले ही पूर्णता प्रमाण पत्र मिल चुका है, वे नये नियमों के दायरे में नहीं आयेंगी।

नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग ने प्रीमियम एफएआर प्रावधानों के साथ-साथ 17वें संशोधन नियमों के माध्यम से 750 वर्ग मीटर से अधिक निर्मित क्षेत्र वाली वाणिज्यिक, संस्थागत और रियल एस्टेट इमारतों के लिए 'हिमाचल प्रदेश ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता (एचपीईसीबीसी) 2018' का अनुपालन अनिवार्य कर दिया है। इन इमारतों में होटल, अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान और वाणिज्यिक परिसर शामिल हैं। नये नियमों के तहत सभी नये वाणिज्यिक और सार्वजनिक भवनों में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग पॉइंट बनाना भी अनिवार्य कर दिया गया है।

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