शिमला , अप्रैल 16 -- हिमाचल प्रदेश सरकार ने यौन उत्पीड़न के आरोपों में राज्य के सरकारी महाविद्यालयों के तीन सहायक प्राध्यापकों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है।

ये महाविद्यालय शिमला, हमीरपुर और चंबा में स्थित हैं। यह कार्रवाई प्राध्यापकों के विरुद्ध की गयी विभागीय जांच के बाद हुई है, जिसमें उन्हें वर्ष 2021 से 2024 के बीच छात्राओं के यौन उत्पीड़न की तीन अलग-अलग घटनाओं में दोषी पाया गया था।

शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने गुरुवार को ये आदेश जारी किये। तीनों मामलों में विस्तृत जांच, गवाहों के बयानों और दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर कार्रवाई की गयी है। एक घटना में, हमीरपुर के नादौन स्थित सिद्धार्थ सरकारी महाविद्यालय में रसायन विज्ञान के सहायक प्राध्यापक डॉ. अनिल कुमार पर यौन उत्पीड़न के आरोप सिद्ध हुये। यह शिकायत 14 नवंबर, 2024 को विज्ञान स्नातक प्रथम वर्ष की एक छात्रा ने दर्ज कराई थी, जिसमें रसायन विज्ञान की प्रयोगात्मक कक्षा के दौरान अनुचित शारीरिक स्पर्श का आरोप लगाया गया था।

शिकायत के बाद, प्रधानाचार्य ने मामले की रिपोर्ट उच्च शिक्षा निदेशक को दी, जिसके परिणामस्वरूप जनवरी 2025 में उन्हें निलंबित कर दिया गया था। मार्च 2025 में शुरू की गयी औपचारिक जांच में एक प्रत्यक्षदर्शी छात्र की पुष्टि के साथ यौन उत्पीड़न और दुराचार के आरोप प्रमाणित पाये गये।

आरोपों से इनकार करने के बावजूद, डॉ. कुमार ने मार्च 2026 में जारी अंतिम कारण बताओ नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया। सरकार ने हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के साथ परामर्श के बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया और भविष्य में किसी भी सरकारी रोजगार के लिये अयोग्य घोषित कर दिया।

एक अन्य घटना में, शिमला के लोहराब स्थित जवाहर लाल नेहरू सरकारी ललित कला महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक पवन कुमार को एक छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न और दुराचार का दोषी पाये जाने के बाद बर्खास्त कर दिया गया। यह मामला 23 जनवरी, 2024 का है, जब परफॉर्मिंग आर्ट्स के सातवें सेमेस्टर की एक छात्रा ने लंबे समय तक उत्पीड़न और छेड़छाड़ के प्रयास का आरोप लगाया था, जिसकी शिकायत बाद में अगस्त 2024 में आंतरिक शिकायत समिति के समक्ष दर्ज कराई गयी थी।

मौखिक, दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, जिनमें फोन कॉल का विवरण और वीडियो शामिल हैं, के आधार पर हुई जांच में पद के दुरुपयोग और देर तक घर पर अभ्यास सत्र के लिये मजबूर करने सहित अन्य आरोप सिद्ध हुये। इसमें शिकायत वापस लेने के लिये परिवार पर दबाव डालने की बात भी सामने आई। लोक सेवा आयोग ने मार्च 2026 में दंड को मंजूरी दी। आरोपी द्वारा अंतिम नोटिस का जवाब न देने पर शिक्षा सचिव ने बर्खास्तगी का आदेश जारी किया।

यह आदेश उन्हें तत्काल प्रभाव से भविष्य के सरकारी रोजगार से भी प्रतिबंधित करता है। तीसरे मामले में, चंबा के सरकारी महाविद्यालय तीसा में गणित के सहायक प्राध्यापक डॉ. वीरेंद्र शर्मा को जांच के बाद दोषी पाया गया। उन पर दिसंबर 2021 में शिमला के चौड़ा मैदान स्थित राजीव गांधी डिग्री कॉलेज में तैनाती के दौरान विज्ञान स्नातक द्वितीय वर्ष की एक छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न और हमले के प्रयास का आरोप था।

एक दिसंबर, 2021 को दर्ज कराई गयी इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि छात्रा को बहाने से बुलाया गया, एक निजी वाहन में शिमला के चक्कर स्थित उनके निवास पर ले जाया गया और महीनों तक अवांछित संदेश भेजने के बाद उन पर हमले का प्रयास किया गया। छात्रा ने बाद में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 354-ए और 354-डी के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी। दिसंबर 2025 में पूरी हुई विभागीय जांच में पाया गया कि प्राध्यापक ने अपने पद का दुरुपयोग किया और घटना के समय ड्यूटी से उनकी अनुपस्थिति सहित मुख्य आरोपों की पुष्टि हुई। मूल जांच अधिकारी के सेवानिवृत्त होने के कारण पहले की कार्रवाई में देरी हुई थी।

हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग ने बर्खास्तगी को मंजूरी दी और आरोपी द्वारा अंतिम नोटिस का जवाब न दिये जाने पर शिक्षा सचिव ने आदेश जारी कर दिया।

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