शिमला , मार्च 28 -- हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन वर्षों के दौरान बैंक और डिजिटल धोखाधड़ी के कुल 585 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें लगभग 150 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय हानि हुई है।
भाजपा विधायक आईडी लखनपाल द्वारा उठाए गए प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने विधानसभा को सूचित किया कि सरकार अपनी प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत कर रही है। इसके तहत साइबर सेल में एआई आधारित टूल्स और विशेष साइबर विशेषज्ञों की तैनाती की जा रही है, ताकि जांच की क्षमता को और प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने जोर दिया कि बैंक धोखाधड़ी के मामलों की प्राथमिकता के आधार पर जांच की जा रही है, ताकि दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में साइबर पुलिस स्टेशनों को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड करने के लिए पहले ही कदम उठाए जा चुके हैं, जिससे डिजिटल लेनदेन की ट्रैकिंग और अंतरराज्यीय धोखाधड़ी नेटवर्क का पता लगाने में मदद मिल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि बैंकों और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाया जा रहा है, ताकि जांच में तेजी लाई जा सके और आगे होने वाले वित्तीय नुकसान को रोका जा सके।
कार्रवाई का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इन धोखाधड़ी मामलों में अब तक 258 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि ठगी गई राशि की वसूली के प्रयास जारी हैं।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ मामलों में बैंक अधिकारियों की लापरवाही या संलिप्तता सामने आई है, और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार केवल सख्ती ही नहीं, बल्कि जनजागरूकता पर भी जोर दे रही है, ताकि लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी के प्रति सतर्क किया जा सके और वे डिजिटल लेनदेन करते समय सावधानी बरतें।
आंकड़ों के अनुसार, कांगड़ा जिले में सबसे अधिक 59 मामले दर्ज किए गए, जिससे यह राज्य का सबसे अधिक प्रभावित जिला बन गया है।
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