शिमला , मई 16 -- हिमाचल प्रदेश में 'राजीव गांधी प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना' के तहत प्राकृतिक खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था के एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभर रही है। राज्य सरकार ने इस साल 63,000 प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों से उनकी उपज खरीदने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को बताया कि यह पहल टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देकर और प्राकृतिक तरीकों से उगाई गई फसलों के लाभकारी दाम सुनिश्चित कर पहाड़ी राज्य के हजारों किसान और बागवान परिवारों के जीवन में आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय बदलाव ला रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब जलवायु परिवर्तन, खेती की बढ़ती लागत, मिट्टी की घटती उर्वरता और जंगली जानवरों के आतंक के कारण पारंपरिक खेती के सामने गंभीर चुनौतियां हैं, प्राकृतिक खेती एक बेहतर और व्यावहारिक विकल्प बनकर उभरी है।

अधिकारी के अनुसार, हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक खेती के जरिए उगाई जाने वाली फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इस कदम का उद्देश्य किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाना और अधिक से अधिक काश्तकारों को पर्यावरण-अनुकूल खेती अपनाने के लिए प्रेरित करना है। राज्य के बजट 2026-27 में घोषित संशोधित दरों के तहत, प्राकृतिक खेती से उगाए गए गेहूं को 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्के को 50 रुपये प्रति किलोग्राम, कच्ची हल्दी को 150 रुपये प्रति किलोग्राम, पांगी घाटी के जौ को 80 रुपये प्रति किलोग्राम और अदरक को 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा जा रहा है।

विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी और सीधे तौर पर पहुंचाने के लिए कृषि विभाग ने चालू वर्ष के दौरान एक लाख नए किसानों को 'हिम परिवार रजिस्टर' से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। अधिकारी ने बताया कि अब तक 70,000 से अधिक किसानों को इस रजिस्टर से जोड़ा जा चुका है, जो तय लक्ष्य का लगभग 70 प्रतिशत है। वर्तमान में, हिमाचल प्रदेश में लगभग 2,23,029 किसान और बागवान परिवार पूर्ण या आंशिक रूप से प्राकृतिक खेती को अपना चुके हैं और राज्य की लगभग 99.3 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक इस खेती का विस्तार हो चुका है।

अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आने वाले वर्षों में एमएसपी के लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, ताकि आर्थिक समृद्धि गांवों तक पहुंचे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गांवों में उत्पन्न होने वाली आय स्थानीय अर्थव्यवस्था के भीतर ही घूमे। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सरकार अब तक 7,382 किसानों से 11,329 क्विंटल प्राकृतिक गेहूं, मक्का, हल्दी और जौ खरीद चुकी है, जिसके बदले 6.40 करोड़ रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए हैं।

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