शिमला , मार्च 31 -- केंद्र सरकार ने 'प्राइड ऑफ हिल्स' पहल के तहत वर्ष 2026-27 के लिए हिमाचल प्रदेश को 3,920 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने की मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य संरचनात्मक बाधाओं का सामना कर रहे पहाड़ी राज्यों में पूंजीगत निवेश को बढ़ावा देना है।
यह सहायता पहाड़ी राज्यों के लिए घोषित 25,000 करोड़ रुपये के 'राज्यों को पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता' (एसएएससीआई) पैकेज का हिस्सा है। इसमें अरुणाचल प्रदेश को सर्वाधिक 4,900 करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं। इसके बाद हिमाचल प्रदेश सबसे बड़े लाभार्थियों में शामिल है।
अधिकारियों ने बताया कि इस योजना को बुनियादी ढांचे के विकास और संपत्ति निर्माण में सहयोग देने के लिए तैयार किया गया है। साथ ही, यह सीमित राजस्व क्षमता और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण वित्तीय दबाव झेल रहे राज्यों की मदद करेगी।
यह कदम 'राजस्व घाटा अनुदान' (आरडीजी) के बंद होने की चिंताओं के बीच उठाया गया है। अनुमान है कि आरडीजी बंद होने से हिमाचल प्रदेश को सालाना करीब 6,000 करोड़ से 8,000 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का सामना करना पड़ सकता है। नये आवंटन से इस अंतर की आंशिक भरपाई होने की उम्मीद है, हालांकि इसका मुख्य ध्यान प्रत्यक्ष राजस्व सहायता के बजाय पूंजीगत व्यय पर है।
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