ऊना (हिमाचल प्रदेश) , अप्रैल 02 -- हिमाचल प्रदेश सरकार के दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में की गयी बढ़ोतरी को राज्य के किसानों और पशुपालकों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। डेयरी क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि बढ़ी हुई कीमतों से न केवल उनकी आय में सुधार होगा, बल्कि पशुपालन की गतिविधियों को जारी रखना भी आसान हो जाएगा।
राज्य के बजट में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गाय के दूध का समर्थन मूल्य 51 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का मूल्य 61 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर करने की घोषणा की थी। प्रति लीटर 10 रुपये की यह वृद्धि छोटे और सीमांत पशुपालकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें उनकी मासिक आय को बढ़ाने की बड़ी क्षमता है।
ऊना जिले में सरकार के इस निर्णय पर लगातार सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। ठकरां गांव के किसान जरनैल सिंह ने कहा कि दूध की कीमतों में वृद्धि से पशुपालकों को सीधा लाभ होगा और उनकी कमाई बढ़ेगी। उन्होंने सरकार के इस कदम को सराहनीय बताया। इसी प्रकार अंब तहसील के चुरुडू गांव के विजय कुमार के अनुसार, दूध के उचित दाम मिलने से और भी युवा डेयरी क्षेत्र में आने के लिए प्रोत्साहित होंगे। उनका तर्क है कि यदि उत्पादकों को उनके उत्पाद का सही मूल्य मिले, तो ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन रोजगार का एक मजबूत और टिकाऊ साधन बन सकता है।
उल्लेखनीय है कि जिले में बड़ी संख्या में परिवार डेयरी गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में दूध की कीमतों में वृद्धि से गांवों में नकदी का प्रवाह बढ़ने और स्थानीय बाजारों में मांग तेज होने की उम्मीद है। इसका लाभ अन्य छोटे सहायक व्यवसायों को भी मिल सकता है।
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