शिमला , फरवरी 05 -- हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुखु ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों के लिए गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दवाओं की एक नई सूची तैयार करने का निर्देश दिया है।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित सूची की जांच एक उच्चाधिकार समिति करेगी और उसे मंजूरी दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माताओं से सीधे दवाइयों की खरीद की ओर बढ़ना केवल लागत बचाने का उपाय नहीं है बल्कि बिचौलियों के कारण होने वाली देरी को समाप्त करने और एक पारदर्शी एवं कुशल आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने की एक रणनीतिक पहल है।
उन्होंने कहा कि बिचौलियों को दरकिनार करने से राज्य को जीवन रक्षक दवाओं का एक स्थिर एवं पर्याप्त भंडार बनाए रखने में मदद मिलेगी, जिसके लिए आवश्यक प्रावधान किए जाएंगे।
गुणवत्ता सुनिश्चित करने की सख्त आवश्यकता पर बलदेते हुए, श्री सुखु ने निर्देश दिया कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को आपूर्ति की जाने वाली दवाओं के नमूने लेने और गुणवत्ता परीक्षण के लिए मौजूदा तंत्र को और मजबूत किया जाए।
उन्होंने कहा कि राज्य के प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में समर्पित गुणवत्ता परीक्षण कक्ष स्थापित किए जाएंगे, जिनमें पर्याप्त कर्मचारी, प्रशिक्षण और सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आवश्यक उपकरण होंगे।
पहले चरण में, इस प्रकार की संरचना इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी), शिमला और डॉ. राजेंद्र प्रसाद सरकारी मेडिकल कॉलेज (आरपीजीएमसी), टांडा में स्थापित की जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे राज्य में दवा कंपनियों द्वारा निर्मित दवाओं की गुणवत्ता की कड़ी जांच सुनिश्चित करें।
उन्होंने पूरे राज्य में औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन नियम, 1945 के अंतर्गत अनुसूची-एम के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया और दोहराया कि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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