शिमला , मार्च 24 -- हिमाचल प्रदेश का जल शक्ति विभाग राज्य में बिजली बिलों का सबसे बड़ा डिफॉल्टर बनकर उभरा है। सरकारी विभागों के कुल लंबित बिजली बकाये में इस विभाग की हिस्सेदारी सबसे अधिक है।

विधानसभा में पेश किए गए एक आधिकारिक उत्तर के अनुसार, 28 फरवरी, 2026 तक सरकारी विभागों, बोर्डों और संस्थानों का कुल बकाया बिजली बिल 495.76 करोड़ रुपये था। इसमें से अकेले जल शक्ति विभाग पर 455.91 करोड़ रुपये का बकाया है, जो कुल देनदारी का 90 प्रतिशत से भी अधिक है।

हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड लिमिटेड (एचपीसेबल) द्वारा सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, जल आपूर्ति योजनाओं और आवश्यक सरकारी सेवाओं के संचालन के लिए बिजली की आपूर्ति की जाती है।

जल शक्ति विभाग के अलावा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग 8.68 करोड़ रुपये के लंबित बकाये के साथ दूसरा सबसे बड़ा डिफॉल्टर है। इसके बाद नगर निगम और नगर पंचायतें (एमसी/एनएसी) 7.55 करोड़ रुपये के साथ तीसरे स्थान पर हैं। शिक्षा विभाग पर 3.08 करोड़ रुपये और राजस्व विभाग पर 1.43 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है।

आंकड़े बताते हैं कि हालांकि कई विभागों पर देनदारियां लंबित हैं, लेकिन इसका मुख्य बोझ जल शक्ति विभाग पर केंद्रित है, जो पूरे राज्य में जल आपूर्ति और पंपिंग सिस्टम चलाने के लिए बड़े पैमाने पर बिजली पर निर्भर है।

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