चंडीगढ़ , फरवरी 26 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने गुरुवार को कहा कि दिल्ली में आयोजित 'इंटरनेशनल एआई समिट' के दौरान युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया अभद्र विरोध प्रदर्शन कोई साधारण प्रदर्शन नहीं था, बल्कि भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की एक सोची-समझी साजिश थी।
श्री चुघ ने कहा कि उभरते हुए तथ्य स्पष्ट रूप से संकेत देते हैं कि यह पूरा प्रकरण कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और गांधी परिवार के इशारे पर रचागया था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रतिष्ठा की कीमत पर राजनीति करना कांग्रेस पार्टी की आदत बन गयी है। उन्होंने कहा कि यह और भी चिंताजनक है कि शिखर सम्मेलन में खलल डालने की कोशिश करने वाले आरोपियों को कथित तौर पर हिमाचल प्रदेश में संरक्षण दिया गया। यदि दिल्ली पुलिस वैध वारंटऔर ट्रांजिट रिमांड आदेशों के साथ वहां पहुंची थी, तो उन्हें रोकना और उनके वाहन को ज़ब्त करना संघीय ढांचे और कानून के शासन की भावना के विपरीत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी राजनीतिक विचारधारा कानून से ऊपर नहीं हो सकती।
श्री चुघ ने कहा कि यदि प्रक्रियात्मक आपत्तियां थीं, तो उन्हें संवैधानिक और कानूनी तंत्र के माध्यम से संबोधित किया जाना चाहिए था। पुलिस-बनाम-पुलिस की स्थिति पैदा करना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि कांग्रेस शासित राज्यों में राजनीतिक हितों को कानून के शासन से ऊपर रखाजा रहा है।
पंजाब के संदर्भ में तरुण चुघ ने कहा कि जो पार्टी सत्ता में आने से पहले अवैध खनन पर पूरी तरह से रोक लगाने का वादा करती थी और खनन से 20,000 करोड़ रुपये के राजस्व का दावा करती थी, अब उसी के वरिष्ठ नेता मलविंदर कांग नेताओं, अधिकारियों और खनन माफिया के बीच मिलीभगत की बात स्वीकार कर रहे हैं। यह बयान अपने आप में 'आप' सरकार की विफलता का प्रमाण है।
गुरदासपुर एएसआई की हत्या और उसके बाद फर्जी मुठभेड़ के आरोपों का जिक्र करते हुए श्री चुघ ने कहा कि ये घटनाक्रम पंजाब में बिगड़ती कानून-व्यवस्था की भयावह तस्वीर पेश करते हैं। बार-बार होने वाली आपराधिक घटनाएं, गैंगवार और पुलिस प्रतिष्ठानों पर हमले संकेत देते हैं कि अपराधियों मेंअब कानून का कोई डर नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि 'आप' सरकार न्याय चाहने वाले पीड़ित परिवारों और सुरक्षा की उम्मीद करने वाले निर्दोष नागरिकों, दोनों की रक्षा करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि जब कोई सरकार प्रशासन से ऊपर अपनी छवि चमकाने को प्राथमिकता देती है, तो व्यवस्था कमजोर हो जाती है। पंजाब के लोग अब एक दृढ़ और जवाबदेह नेतृत्व चाहते हैं जो कानून-व्यवस्था बहाल कर सके।
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