शिमला , जनवरी 10 -- हिमाचल प्रदेश के चलौंठी में ढल्ली-संजौली बाईपास पर निर्माणाधीन चार लेन सुरंग के ऊपर स्थित आवासीय मकानों और एक होटल में दरारें पड़ गईं हैं जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) पहले से ही चलौंठी में सुरंग निर्माण को लेकर एक शिकायत की जांच कर रहा है।

आवासीय मकानों और एक होटल में दरारें आने से ठीक दो दिन पहले, 8 जनवरी को एनजीटी की प्रधान पीठ ने शिमला जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-5 (एनएच-5) के चौड़ीकरण से जुड़े पर्यावरणीय और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर स्वतः संज्ञान लिया था।

अधिकरण ने टिप्पणी की थी कि यह परियोजना पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

याचिकाकर्ता, जो शिमला (ग्रामीण) के मशोबरा और लिंडी-धार क्षेत्रों के एक भूमि स्वामी हैं, ने आरोप लगाया कि चार लेन परियोजना के तहत अत्यंत अस्थिर ढलान पर भारी निर्माण कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लगभग 70 डिग्री ढलान वाले इस क्षेत्र में निर्माण के कारण भूस्खलन, निजी भूमि को नुकसान और पर्यावरणीय क्षरण हो रहा है।

एनजीटी ने मामले की शीघ्र सुनवाई की याचिका स्वीकार करते हुए संबंधित प्राधिकरणों को नोटिस जारी किया और निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा उपायों और पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया।

गौरतलब है कि चलौंठी के निवासियों ने मकानों और होटल में दरारें पड़ने से कुछ दिन पहले ही इसी तरह की आशंकाएं जताई थीं। उन्होंने सुरंग निर्माण के कारण भूमि में कंपन और संरचनात्मक क्षति होने की बात कही थी। इस घटना के बाद शुक्रवार देर रात लोगों को घर खाली कराने पड़े और ढल्ली-संजौली बाईपास को बंद करना पड़ा, जिससे जन चिंता और बढ़ गई।

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