दरभंगा , अक्टूबर 16 -- स्वराज पीठ की ओर से आयोजित तीन दिवसीय हिन्द स्वराज अध्ययन शिविर की शुरुआत सर्वधर्म प्रार्थना सभा और योगाभ्यास के साथ हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता संयोजक अजीत कुमार मिश्र ने की।
शिविर में समाज में व्याप्त कटुता, आपसी कलह, नशाखोरी, हिंसा तथा पंचायती राज व्यवस्था में भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने महात्मा गांधी की पुस्तक 'हिन्द स्वराज' के विचारों को गांव-गांव तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
वरिष्ठ पत्रकार एवं गांधीवादी चिंतक अमरेश्वरी चरण सिंहा ने कहा कि वर्तमान समय में मानवीय मूल्यों का क्षरण, हिंसा, असहिष्णुता, उपभोक्तावाद, सामाजिक विभाजन तथा प्रकृति के साथ बढ़ता असंतुलन गंभीर चुनौतियां हैं। ऐसे समय में यह विचार करना जरूरी है कि तेजी से बदलती दुनिया में मनुष्य के भीतर मानवीय संवेदना और मूल्यों को कैसे बनाए रखा जाए।
स्वराज पीठ से जुड़े विकास शुक्ला ने कहा कि आज हमारे पास पहले से अधिक तकनीक, साधन और सूचनाएं हैं, लेकिन यह विचार करना जरूरी है कि क्या हमारे भीतर संवेदना, सहिष्णुता, आत्मसंयम और मानवीयता भी उसी अनुपात में बची है। गांधी के विचारों के माध्यम से इन मूल्यों को संरक्षित किया जा सकता है।
पत्रकार शशि मोहन भारद्वाज ने ग्राम व्यवस्था से जोड़कर बाल एवं महिला सशक्तीकरण की दिशा में काम करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं।
प्रो. शारदानंद चौधरी ने ग्राम व्यवस्था को मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई। बांका जिले से आए भोला यादव ने कहा कि हिंसा मनुष्य को समूल नष्ट कर देती है। अहिंसा के माध्यम से ही सुंदर, शांतिपूर्ण और सुखमय समाज का निर्माण संभव है।
अध्यक्षीय संबोधन में अजीत कुमार मिश्र ने कहा कि वर्ष 1909 में लिखी गई गांधीजी की पुस्तक 'हिन्द स्वराज' केवल औपनिवेशिक शासन से राजनीतिक मुक्ति की बात नहीं करती, बल्कि इसमें आधुनिक सभ्यता, विकास, मशीन, नैतिकता, स्वराज, स्वावलंबन, सत्य, अहिंसा, साधन और साध्य तथा मानवीय जीवन-मूल्यों से जुड़े बुनियादी प्रश्न उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि आज भी ये प्रश्न प्रासंगिक हैं। हमें स्वयं का मूल्यांकन करते हुए गांधीजी के विचारों को समझने और उन्हें जीवन में अपनाने की जरूरत है।
शिविर में योगेंद्र यादव, शोभा शुक्ला, मनोहर झा, विनोद यादव, जीवन मुखिया, सुदर्शन चौपाल, दुर्गानंद चौधरी एवं निवेदन कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किए। धन्यवाद ज्ञापन शोभा शुक्ला ने किया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित