अहमदाबाद , जनवरी 12 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि हिन्द प्रशांत क्षेत्र भारत और जर्मनी दोनों के लिए उच्च प्राथमिकता है और इस क्षेत्र में तालमेल बढ़ाने के लिए एक परामर्श तंत्र की शुरुआत की जा रही है साथ ही दोनों देश सुरक्षित, विश्वसनीय और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला बनाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। भारत की दो दिन की यात्रा पर आये जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ वार्ता के बाद श्री मोदी ने संयुक्त प्रेस वक्तव्य में कहा कि भारत और जर्मनी हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर चले हैं और इस दोस्ती का प्रभाव विश्व स्तर पर भी दिखाई देता है। घाना, कैमरून और मलावी जैसे देशों में संयुक्त परियोजनाओं से हमारी त्रिस्तरीय विकास साझेदारी दुनिया के लिए एक सफल मॉडल है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों के विकास के लिए अपने साझा प्रयासों को आगे भी निरंतर जारी रखेंगे।
उन्होंने कहा कि हिन्द प्रशांत दोनों देशों के लिए उच्च प्राथमिकता है। इस क्षेत्र में तालमेल को बढ़ाने के लिए हम एक परामर्श तंत्र की शुरुआत करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने यूक्रेन और गाज़ा सहित कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा," भारत सभी समस्याओं और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर रहा है, और इस दिशा में किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन करता है। हम एकमत हैं कि आतंकवाद पूरी मानवता के लिए एक गंभीर खतरा है। " श्री मोदी ने कहा कि भार और जर्मनी इसके विरुद्ध एकजुट होकर पूरी दृढ़ता से लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी सहमत हैं कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थाओं में सुधार अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए जी 4 के माध्यम से दोनों का संयुक्त प्रयास इसी सोच का प्रमाण है।
श्री मोदी ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच प्रौद्योगिकी सहयोग साल दर साल मजबूत हुआ है और आज इसका प्रभाव जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत और जर्मनी की प्राथमिकताएं समान हैं। इसमें सहयोग बढ़ाने के लिए भारत-जर्मनी उत्कृष्टता केन्द्र स्थापित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि यह ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार का साझा मंच बनेगा। उन्होंने कहा," हम जलवायु, ऊर्जा, शहरी विकास और शहरी आवागमन जैसे क्षेत्रों में मिलकर नई परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि हरित हाइड्रोजन में दोनों देशों की कंपनियों का नया मेगा प्रोजेक्ट, भविष्य की ऊर्जा के लिए कायापलट करने वाला साबित होगा। उन्होंने कहा, " भारत और जर्मनी , सुरक्षित, विश्वसनीय और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला बनाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। इन सभी विषयों पर आज किए जा रहे समझौता ज्ञापनों से सहयोग को नई गति और मजबूती मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ता सहयोग परस्पर भरोसे और साझी सोच का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रक्षा व्यापार से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए वह चांसलर मर्ज़ का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा," हम रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए एक रोडमैप पर भी काम करेंगे, जिससे सह विकास और सह उत्पादन के नए अवसर खुलेंगे।"श्री मोदी ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच ऐतिहासिक और गहरे जन संबंध हैं और आज हम इस ऐतिहासिक जुड़ाव को आधुनिक साझेदारी का रूप दे रहे हैं। आव्रजन, आवागमन, और कौशल बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया है और भारत की प्रतिभाशाली युवाशक्ति जर्मनी की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि वैश्विक कौशल साझेदारी पर जारी संयुक्त घोषणा इसी भरोसे का प्रतीक है। इससे खास तौर पर स्वास्थ्य क्षेत्र में पेशेवरों की आवाजाही आसान होगी।
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