श्रीगंगानगर , जून 16 -- राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले के हिंदूमलकोट थाना क्षेत्र में भारत-पाकिस्तान सीमा स्थित हिंदूमलकोट गांव के पुराने और ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन को रेलवे म्यूजियम में परिवर्तित करने की मांग उठी है।

क्षेत्रीय रेल उपभोक्ता परामर्शदात्री समिति (जेडआरयूसी) के पूर्व सदस्य और रेलवे मामलों के विशेषज्ञ भीमप्रकाश शर्मा ने इस संबंध में राजस्थान प्रदेश कुश्ती संघ के अध्यक्ष राजीव दत्ता को ज्ञापन सौंपा। श्री दत्ता के श्रीगंगानगर आगमन के दौरान हिंदूमलकोट गांव भ्रमण के अवसर पर भीमप्रकाश शर्मा ने ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराया कि पुराना रेलवे स्टेशन अब भी काफी अच्छी स्थिति में मौजूद है। मुख्य स्टेशन भवन की मरम्मत करके उसे आकर्षक रूप दिया जा सकता है। यहां माल गोदाम, पुराना रेलवे सिग्नल सिस्टम-हालांकि कुछ खंडहर जैसी स्थिति में है और अन्य संरचनाएं उपलब्ध हैं।

श्री शर्मा ने सुझाव दिया कि पुराने भाप से चलने वाले रेल इंजन और डिब्बों को यहां लाकर प्रदर्शित किया जाये। इससे सीमा क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण केंद्र तैयार हो सकेगा।

हिंदूमलकोट एक प्राचीन गांव है। भारत-पाक विभाजन से पहले नयी दिल्ली से बठिंडा होते हुए रेलगाड़ियां हिंदूमलकोट के रास्ते कराची तक जाती-आती थीं। विभाजन के कई वर्षों बाद भी यही मार्ग सक्रिय रहा। अंतर केवल इतना था कि बठिंडा से आने वाली गाड़ियां हिंदूमलकोट स्टेशन पर रुक जाती थीं और आगे पाकिस्तानी लोको पायलट गाड़ी ले जाते थे। इसी प्रकार पाकिस्तान से आने वाली गाड़ियों को यहां रोका जाता था और भारतीय पायलट आगे ले जाते थे। पुराने रेलवे स्टेशन के सामने अब भी पुराना ट्रैक मौजूद है, जो अंतरराष्ट्रीय सीमा की जीरो लाइन तक जाता है। यहां पुरानी रेलवे गुमटी भी बनी हुई है। बीकानेर रियासत के समय हिंदूमलकोट एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मंडी थी। इसके व्यापारिक संबंध बहावलपुर, कराची, लाहौर, पेशावर और अफगानिस्तान में काबुल और कंधार तक फैले हुए थे। चना व्यापार में इस मंडी की विशेष पहचान थी। अंग्रेजी शासनकाल में दिल्ली को कराची से जोड़ने वाले तीन रेल मार्गों में से एक यही मार्ग था।

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