हाथरस , जून 28 -- उत्तर प्रदेश सरकार की औद्योगिक विकास नीति के तहत यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने हाथरस को हाईटेक औद्योगिक एवं आवासीय शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 'मास्टर प्लान-2041' के अंतर्गत प्रस्तावित 'हाथरस अर्बन सेंटर' को इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
यीडा के फेज-2 विकास कार्यक्रम के तहत हाथरस को विकसित किए जा रहे चार प्रमुख अर्बन नोड्स-अलीगढ़, मथुरा, आगरा और हाथरस-में विशेष रूप से औद्योगिक विनिर्माण केंद्र के रूप में चुना गया है। प्रस्तावित परियोजना के तहत हाथरस और सासनी तहसील के 50 से अधिक गांवों को शामिल करते हुए लगभग 4,000 हेक्टेयर (करीब 10 हजार एकड़) क्षेत्र में नया हाईटेक शहर बसाया जाएगा। परियोजना की योजना तैयार करने के लिए आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स लिमिटेड को नियुक्त किया गया है, जो जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) आधारित मास्टर प्लान तैयार कर रही है।
मास्टर प्लान-2041 के अनुसार हाथरस अर्बन सेंटर को चार प्रमुख क्षेत्रों में विकसित किया जाएगा। इसमें औद्योगिक जोन में विनिर्माण इकाइयों और फैक्ट्रियों की स्थापना होगी, जबकि आवासीय क्षेत्र में कर्मचारियों के लिए आधुनिक आवासीय कॉलोनियां और किफायती आवास विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा कमर्शियल एवं लॉजिस्टिक्स हब में मॉल, होटल, कमर्शियल टावर और वेयरहाउस स्थापित किए जाएंगे। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए कुल क्षेत्रफल का 15 प्रतिशत से अधिक हिस्सा ग्रीन बेल्ट और खुले क्षेत्र के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा।
प्राधिकरण के सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित अर्बन सेंटर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी रणनीतिक स्थिति है। यह नोएडा अंतरराष्ट्रीय (जेवर) हवाईअड्डे के कैचमेंट क्षेत्र में स्थित होगा और एक्सप्रेस-रोड नेटवर्क के माध्यम से एयरपोर्ट से जुड़ा रहेगा। इसके अलावा यह यमुना एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग-93 (आगरा-अलीगढ़), बरेली-मथुरा हाईवे तथा स्टेट हाईवे-33 से भी बेहतर संपर्क में रहेगा। इसे आगरा के सैटेलाइट टाउन के रूप में भी विकसित करने की योजना है।
परियोजना से हाथरस के स्थानीय उद्योगों को भी नई पहचान मिलने की उम्मीद है। जिले की 10 हजार से अधिक पंजीकृत एमएसएमई इकाइयों को विश्वस्तरीय आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत प्रसिद्ध हींग और गुलाल उद्योग के लिए आधुनिक पैकेजिंग तथा निर्यात सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
इसके अलावा कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कोल्ड स्टोरेज, फूड प्रोसेसिंग यूनिट और डेयरी संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। रेडीमेड गारमेंट्स, कांच के मोती, पीतल के आभूषण, मशीन टूल्स और इलेक्ट्रिक वाहनों के कलपुर्जों के निर्माण के लिए भी विशेष औद्योगिक ब्लॉक विकसित किए जाएंगे। अगले चरण में मेडिकल-सर्जिकल उपकरण और पावर ग्रिड मशीनरी निर्माण से जुड़ी वैश्विक कंपनियों को निवेश के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
यीडा के अनुसार परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। परियोजना के पूर्ण होने पर क्षेत्र की औद्योगिक और आर्थिक तस्वीर बदलने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
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