बैतूल , जुलाई 31 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को समय पर सोनोग्राफी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने निजी सोनोग्राफी केंद्रों की सेवाएं लेने का निर्णय किया है। इसके तहत जिन शासकीय अस्पतालों में सोनोग्राफी की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां आने वाली हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को निजी केंद्रों पर निःशुल्क सोनोग्राफी के लिए रेफर किया जाएगा। प्रत्येक जांच के लिए संबंधित निजी केंद्र को 500 रुपये का भुगतान किया जाएगा।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय में निजी सोनोग्राफी केंद्र संचालकों की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सीएमएचओ डॉ. मनोज कुमार हुरमाड़े ने की। उन्होंने बताया कि योजना का उद्देश्य हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच सुनिश्चित कर मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है।
बैठक में बताया गया कि रेफर की जाने वाली प्रत्येक गर्भवती महिला की अलग पहचान (आईडी) बनाई जाएगी और पूरी प्रक्रिया सुमन डिजिटल पोर्टल के माध्यम से संचालित होगी। इससे मरीजों की ट्रैकिंग, जांच की निगरानी और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव शर्मा ने सुमन डिजिटल पोर्टल की कार्यप्रणाली की जानकारी देते हुए निजी संचालकों से निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सेवाओं की प्रभावी निगरानी की जाएगी।
बैठक में पाढर अस्पताल, श्री मोहनी रेडियोलॉजी सेंटर, आरोग्य निकेतन गंज, आशीर्वाद नर्सिंग होम, चौहान हॉस्पिटल बैतूल, रघुवंशी क्लीनिक मुलताई, कृष्णा सोनोग्राफी, कुपार हॉस्पिटल, श्री गंजानंद सेंटर, क्रिस मेमोरियल हॉस्पिटल मुलताई, अनंत सोनोग्राफी सेंटर तथा डॉ. सिंह सोनोग्राफी सेंटर सहित जिले के कई निजी संस्थानों के संचालक उपस्थित रहे।
इस बीच जिला अस्पताल की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन उपलब्ध होने के बावजूद रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति नहीं होने से उसका पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा है। इसके कारण बड़ी संख्या में मरीजों को निजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जिला अस्पताल में स्थायी रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति होने पर मरीजों को सरकारी स्तर पर नियमित और बेहतर सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने से दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाली हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को समय पर सोनोग्राफी जांच उपलब्ध होगी और उपचार में होने वाली देरी कम होगी।
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