नैनीताल , जुलाई 30 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने स्वास्थ्य महानिदेशालय में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी रजनी रावत के हरिद्वार तबादले के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए है।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि पूर्व में 13 फरवरी 2026 के तबादला आदेश को हाईकोर्ट ने इस आधार पर निरस्त किया था कि प्रशासनिक आधार पर तबादला करने से पहले उत्तराखंड स्थानांतरण अधिनियम, 2017 के तहत उन्हें सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। इसके बावजूद नए तबादला आदेश से पूर्व भी न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। याचिका में यह भी कहा गया कि उन्हें समिति की बैठक की तिथि की विधिवत सूचना नहीं दी गई।

राज्य सरकार की ओर से न्यायालय को दिए गए निर्देशों में कहा गया कि याचिकाकर्ता को बैठक की मौखिक सूचना दी गई थी तथा उन्होंने समिति के समक्ष सहयोग नहीं किया। हालांकि, इस दावे के समर्थन में कोई ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया जिससे यह साबित हो सके कि वह सुनवाई के समय उपस्थित थीं। इस पर अदालत ने माना कि मामला विचारणीय है।

खंडपीठ ने राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई तक तीन जुलाई के तबादला आदेश तथा सात जुलाई और 20 जुलाई 2026 के कार्यमुक्ति आदेशों के प्रभाव और संचालन पर अंतरिम रोक लगा दी है।

इस मामले में सुनवाई बुधवार को हुई लेकिन आदेश की प्रति गुरुवार का मिली। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि इससे पहले शासन ने याचिकाकर्ता का स्थानांतरण चमोली कर दिया था। इसके खिलाफ उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। 25 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट ने चमोली स्थानांतरण आदेश को निरस्त करते हुए विभाग को उनका पक्ष सुनकर निर्णय लेने का निर्देश दिये थे।

इसके अनुपालन में इस वर्ष 24 मार्च को विभाग ने वह स्थानांतरण आदेश वापस ले लिया। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने तीन जुलाई को याचिकाकर्ता का पुनः प्रशासनिक आधार पर देहरादून से हरिद्वार स्थानांतरण कर दिया तथा गत सात जुलाई और 20 जुलाई को उन्हें कार्यमुक्त करने के आदेश भी जारी कर दिए।

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