नैनीताल , अगस्त 11 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने मंगलवार को जारी महत्वपूर्ण आदेश में हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदी को उपचार के लिए तत्काल प्रभाव से पुलिस बल उपलब्ध कराने के साथ ही बुधवार सुबह तक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश भेजने के निर्देश दिए हैं।

अदालत ने इसे गंभीर चूक बताते हुए ऊधमसिंह नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अजय गणपति को जवाबी हलफनामा दायर करने के निर्देश दिए हैं कि सितारगंज केंद्रीय कारागार की ओर से बार बार अनुरोध करने के बावजूद पुलिस बल क्यों नहीं उपलब्ध कराया गया और दोषी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।

न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने बंदी मंसाद की अल्पावधि जमानत (शार्ट टर्म बेल) प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए ये आदेश पारित किये। मामले के अनुसार सजायाफ्ता बंदी को नौ अगस्त 2019 को हल्द्वानी के प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

अदालत के समक्ष सितारगंज केंद्रीय कारागार कि रिपोर्ट पेश करते हुए कहा गया कि गई बंदी को 24 मई 2026 को एम्स ऋषिकेश भेजा गया था, जहां चिकित्सकों ने उसकी बाईपास सर्जरी की सलाह दी। इसके बाद जेल प्रशासन की ओर से ऊधमसिंह नगर के एसएसपी कार्यालय से सुरक्षा के लिहाज से पुलिस बल उपलब्ध कराने की मांग की गयी लेकिन पुलिस बल उपलब्ध नहीं हो सका। यह भी कहा गया कि इसके चलते बंदी को अब तक एम्स में भर्ती नहीं कराया जा सका।

रिपोर्ट में सामने आया कि केंद्रीय कारागार की ओर से 16 जून से 28 जुलाई 2026 के बीच लगभग 10 बार पुलिस अधिकारियों को पत्र भेजकर पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। इसके बावजूद अलग-अलग कारणों से पुलिस बल उपलब्ध नहीं कराया जा सका।

खंडपीठ ने आदेश की प्रति तत्काल ऊधमसिंह नगर के एसएसपी को भेजने के निर्देश दिए। साथ ही एसएसपी को आज शाम तक पुलिस बल की व्यवस्था कर केंद्रीय कारागार के अधीक्षक से समन्वय करने को कहा गया, ताकि बंदी को बुधवार सुबह एम्स ऋषिकेश उपचार के लिए भेजा जा सके।

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