नैनीताल , अक्टूबर 06 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने मंगलवार को जारी अपने अहम निर्णय में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक स्टेटिस्टिक्स (सांख्यकी) के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) सीट पर सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थी के चयन को अवैध करार दिया है।

न्यायालय ने चयन समिति की सिफारिश को रद्द करते हुए याचिकाकर्ता की नियुक्ति पर तीन सप्ताह के भीतर फैसला लेकर नियुक्ति पत्र जारी करने के निर्देश दिये हैं।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने जगदीश चंद्र पुरोहित की याचिका पर फैसला सुनाते हुए साफ किया कि विज्ञापन में ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षित पद पर ऐसे अभ्यर्थी का चयन नहीं किया जा सकता, जिसने इस श्रेणी के तहत आवेदन ही नहीं किया हो।

मामले के अनुसार विश्वविद्यालय ने 14 अगस्त 2023 को कॉलेज ऑफ फॉरेस्ट्री में सहायक प्राध्यापक (स्टेटिस्टिक्स) के एक पद के लिए विज्ञापन जारी किया था। यह पद ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए आरक्षित था। पद के लिए तीन अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। इनमें याचिकाकर्ता जगदीश चंद्र पुरोहित और प्रतिवादी नंबर तीन को साक्षात्कार के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया। 16 फरवरी 2024 को चयन समिति ने साक्षात्कार के बाद प्रतिवादी नंबर तीन पंकज बहुगुणा के चयन की सिफारिश कर दी। उसे साक्षात्कार में 25 में से 21 अंक मिले थे। आरटीआई से मिली जानकारी के बाद जगदीश चंद्र पुरोहित ने चयन प्रक्रिया को उच्च न्यायालय में चुनौती दी।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने विश्वविद्यालय से चयन के मानदंड और दोनों अभ्यर्थियों के प्राप्तांक का रिकॉर्ड मांगा। विश्वविद्यालय ने बताया कि कुल 25 अंकों में पांच अंक प्रस्तुतीकरण और 20 अंक साक्षात्कार के लिए निर्धारित थे।

रिकॉर्ड के मुताबिक, याचिकाकर्ता को प्रस्तुतीकरण में दो और साक्षात्कार में 13 अंक मिले। उसके कुल 15 अंक थे। वहीं, प्रतिवादी नंबर तीन ने प्रस्तुतीकरण में चार और साक्षात्कार में 17 अंक के साथ कुल 21 अंक हासिल किये।

अदालत ने पाया कि प्रतिवादी नंबर तीन ईडब्ल्यूएस श्रेणी का अभ्यर्थी नहीं था। उसने ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत आवेदन नहीं किया था और उसके पास इस श्रेणी का प्रमाणपत्र भी नहीं था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण का लाभ लेने के लिए संबंधित कानून के तहत प्रमाणपत्र अनिवार्य है।

प्रतिवादी की ओर से दलील दी गई कि यदि ईडब्ल्यूएस श्रेणी में उपयुक्त अभ्यर्थी न मिले तो आरक्षित पद सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थी से भरा जा सकता है। हालांकि, उच्च न्यायालय ने कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता को अनुपयुक्त घोषित करने के लिए कोई न्यूनतम कटऑफ तय नहीं है। केवल अधिक अंक मिलना सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थी को ईडब्ल्यूएस सीट पर चयनित करने का आधार नहीं बन सकता।

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