भदोही , जनवरी 20 -- भारतीय हैंडनाटेड कालीनों में पश्चिमी देशों के खरीददारों की गहरी रुचि के कारण जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में आयोजित हाइमटेक्सटाइल-2026 में अमेरिकी टैरिफ का असर कुछ कम दिखाई पड़ा। मेले में मिली अभूतपूर्व सफलता से कालीन निर्यातक उत्साहित हैं।
जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में 13 से 16 जनवरी के बीच आयोजित हुए हिमटेक्स्टिल-2026 में कालीन निर्यात संवर्धन परिषद द्वारा सहभागिता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया गया। जिसमें 50 भारतीय कालीन निर्यातक सदस्यों की सहभागिता रही। अमेरिकी टैरिफ के बीच मेले की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि हाइमटेक्सटाइल की आयोजक टीम द्वारा कालीन और गलीचों को एक समर्पित सेगमेंट के रूप में शामिल किया गया जो भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि रही।
कालीन मेले की सबसे बड़ी विशेषता रही कि प्राथमिकताओं और खरीददारों की भागीदारी के रुझान में स्पष्ट बदलाव दिखाई पड़ा जो भारतीय टेक्सटाइल उद्योग पर अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ का जबाब माना जा रहा है। विभिन्न देशों से आए खरीदारों ने भारतीय पवेलियन का दौरा कर इंडियन हैंडमेड कारपेट की बेहतर डिजाइनों को लेकर उत्साहित दिखे। हालांकि अंतरराष्ट्रीय मेले में अमेरिकी बायरों की तादाद कम नहीं थी, लेकिन टैरिफ के कारण उनका भारतीय कालीनों के प्रति रुझान कुछ कम ही रहा। हालांकि भारतीय कालीनों के सकल निर्यात का 50 से 60 फीसद अमेरिका को ही होता रहा है।
इस दौरान, भारत के महावाणिज्य दूतावास, फ्रैंकफर्ट द्वारा बिजनेस संवादात्मक सत्रों का आयोजन किया गया, जिनके माध्यम से भारतीय निर्यातकों और जर्मन हितधारकों के बीच प्रत्यक्ष संवाद स्थापित हुआ। इन संवादों का उद्देश्य द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करना, बाजार की आवश्यकताओं को समझना तथा वस्त्र एवं फ़्लोर कवरिंग क्षेत्र में व्यापारिक संपर्कों को और अधिक मजबूत करना रहा।
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