भोपाल , अक्टूबर 16 -- मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के हलालपुरा पटाखा बाजार की 15 आतिशबाजी दुकानों को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बैरागढ़ के एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव ने इन दुकानों को जन सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए लोक न्यूसेंस घोषित किया है। आदेश के अनुसार, उच्च न्यायालय से स्थगन हटते ही बाजार को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कार्रवाई की जाएगी। तब तक दुकानदारों को सुरक्षा संबंधी 13 शर्तों का पालन करना होगा।

इस मामले में जबलपुर उच्च न्यायालय में 12 रिट याचिकाएं और आठ अवमानना प्रकरण लंबित हैं। इन मामलों में न्यायालय ने आदेश सुरक्षित रखा है और स्थगन भी दिया है। एसडीएम के आदेश में कहा गया है कि निर्धारित शर्तों का उल्लंघन करने पर संबंधित दुकान मालिक को छह महीने तक के कारावास का दंड हो सकता है। तहसीलदार, नगर निगम के उपायुक्त और थाना प्रभारी को आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन ने दुकानदारों के लिए विस्फोटक अधिनियम के प्रावधानों का पालन, अग्नि सुरक्षा और विद्युत सुरक्षा के इंतजाम, यातायात प्रबंधन तथा भीड़ नियंत्रण जैसी शर्तें तय की हैं। दुकानदारों को अग्नि सुरक्षा की मॉक ड्रिल कराने और विद्युत सुरक्षा तथा अग्निशमन संबंधी अनापत्ति प्रमाणपत्र एसडीएम न्यायालय में प्रस्तुत करने होंगे। निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज वाले पटाखों और कार्बाइड गन की बिक्री पर भी प्रतिबंध रहेगा। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के निर्देशों का पालन करना भी अनिवार्य होगा।

एसडीएम ने आदेश में 12 जून 2026 की रात सोनी पटाखा दुकान में लगी भीषण आग का उल्लेख किया है। दुकान के पास पेट्रोल पंप होने के कारण बड़े हादसे की आशंका जताई गई थी। हलालपुरा क्षेत्र से भोपाल-इंदौर मार्ग की बसों का संचालन होता है और यहां चार्टर बसों का टर्मिनल भी है। ऐसे में आग लगने की स्थिति में जनहानि की आशंका को गंभीर माना गया है।

वही वर्ष 2024 में हरदा पटाखा फैक्ट्री हादसे के बाद हलालपुरा बाजार सहित भोपाल की पटाखा दुकानों, गोदामों और फैक्ट्रियों की जांच की गई थी। उस समय तत्कालीन बैरागढ़ एसडीएम आदित्य जैन ने भी बाजार को खतरनाक बताते हुए दुकानों और गोदामों को शहरी सीमा से बाहर गैर आवासीय क्षेत्र में स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी। जांच रिपोर्ट में रहवासी क्षेत्र की निकटता, दुकानों के बीच कम दूरी, सीमित पहुंच मार्ग और अग्निशमन व्यवस्था की कमी को जोखिम का कारण बताया गया था।

हलालपुरा में पहले आबादी कम थी, लेकिन अब आसपास आवासीय क्षेत्र और व्यावसायिक परिसर विकसित हो गए हैं। इससे पटाखा बाजार की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। प्रशासन की प्रस्तावित कार्रवाई अब उच्च न्यायालय में लंबित मामलों और स्थगन हटने की स्थिति पर निर्भर करेगी।

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