महोबा , अक्टूबर 03 -- उत्तर मध्य रेलवे ने जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण की दिशा में पहल करते हुए अपने विभिन्न रेलवे परिसरों में वर्षा जल संचयन प्रणालियों का विस्तार किया है। रेलवे भवनों की छतों और खुले क्षेत्रों में एकत्र होने वाले वर्षा जल को रिचार्ज पिट, सोक पिट, पुराने कुओं, सूखे बोरवेल और डीप बोर जैसी संरचनाओं के माध्यम से जमीन में पहुंचाया जा रहा है। 18 सितंबर तक उत्तर मध्य रेलवे में कुल 124 वर्षा जल संचयन संरचनाएं पूरी की जा चुकी हैं।

झांसी रेल मंडल के पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने शनिवार को बताया कि जल संरक्षण की शुरुआत किसी बड़े जलाशय से ही हो, यह जरूरी नहीं है। छतों और खुले क्षेत्रों से एकत्र होने वाले वर्षा जल को उचित तरीके से जमीन में पहुंचाकर भूजल पुनर्भरण में योगदान दिया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि उत्तर मध्य रेलवे के विभिन्न परिसरों में भवनों की छतों और अन्य उपयुक्त सतहों से वर्षा जल को पाइपों के माध्यम से रिचार्ज पिट, सोक पिट, पुराने कुओं, सूखे बोरवेल और डीप बोर तक पहुंचाया जाता है। आवश्यक फिल्ट्रेशन के बाद पानी को नियंत्रित तरीके से जमीन में समाहित किया जाता है।

श्री सिंह के अनुसार उत्तर मध्य रेलवे में पूरी की गई 124 वर्षा जल संचयन संरचनाओं में 38 आगरा मंडल, 41 प्रयागराज मंडल और 45 झांसी मंडल में हैं। स्थानीय परिस्थितियों, उपलब्ध स्थान और मौजूदा रेलवे परिसंपत्तियों के अनुसार अलग-अलग रिचार्ज प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया है।

झांसी मंडल में महोबा, पामन, मलासा, आटा, भुआ, मोंठ, चिरगांव, परिछा, झांसी और ग्वालियर सहित विभिन्न स्थानों पर वर्षा जल संचयन की व्यवस्थाएं की गई हैं। महोबा में छत से आने वाले वर्षा जल को पुराने कुएं की ओर मोड़ा गया है, जबकि पामन में सूखे बोरवेल को वर्षा जल पुनर्भरण के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। मलासा और आटा में जल तारा एवं सोक पिट आधारित प्रणालियां अपनाई गई हैं। झांसी में रेलवे कॉलोनियों, बीटीसी, एसी लोको शेड और अन्य परिसरों में रिचार्ज व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं। ग्वालियर में रिचार्ज पिट के माध्यम से वर्षा जल को जमीन तक पहुंचाया जा रहा है।

इसी तरह प्रयागराज मंडल में प्रयागराज, कानपुर, इटावा, फिरोजाबाद, हाथरस, दादरी, दनकौर, चुनार, लूसा और खैराही सहित विभिन्न स्थानों पर भवनों और अन्य सतहों से एकत्र वर्षा जल को पाइपों तथा फिल्ट्रेशन व्यवस्था के जरिए रिचार्ज संरचनाओं तक पहुंचाया जा रहा है। तकनीकी रूप से उपयुक्त स्थानों पर मौजूदा डीप बोर और बोरवेल का भी रिचार्ज प्वाइंट के रूप में उपयोग किया जा रहा है।

पीआरओ ने बताया कि कई स्थानों पर वर्षा जल को सीधे रिचार्ज संरचना में भेजने के बजाय फिल्ट्रेशन और फर्स्ट-फ्लश व्यवस्था से गुजारकर आगे पहुंचाया जाता है। जहां पहले से कुएं या बोर उपलब्ध हैं, वहां नई संरचना बनाने के बजाय उन्हें रिचार्ज व्यवस्था का हिस्सा बनाया जा रहा है।

उत्तर मध्य रेलवे के अनुसार इन प्रयासों का उद्देश्य वर्षा जल को बहकर व्यर्थ जाने से रोकना, सतही बहाव कम करना और उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देना है।

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