उदयपुर , मार्च 12 -- राजस्थान में उदयपुर में समग्र जैन समाज की ओर से श्री मेवाड़ जैन युवा संस्थान द्वारा जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री ऋषभदेव का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव प्रथमेश- 2026 गुरूवार को हर्षेाल्लास के साथ मनाया गया।

संस्थान के संरक्षक पारस सिंघवी एवं अध्यक्ष निर्मल मालवी ने बताया कि सुबह जैन धर्म के साधु-सन्तों के सानिध्य में नगर निगम प्रांगण में ध्वजारोहण किया गया जिसके पुण्यार्जक महावीर, साहिल वनावत थे। समाज प्रमुख शांतिलाल वेलावत, महेंद्र टाया आदि की उपस्थिति में शहर में भ्रमण के लिये शोभायात्रा निकाली गयी।

शहर में विभिन्न स्थानों पर 20 से ज्यादा स्वागत द्वार लगाये गये जहां समाज के महिलाओं पुरूषों समूहों मेें एक साथ खड़े होकर शोभायात्रा का स्वागत किया। शोभायात्रा टाउन हॉल से प्रारंभ होकर सूरजपोल चौराहा, झीणीरेत, मार्शल चौराहा, मंडी की नाल, देहली गेट, बापू बाजार, होते हुए पुनःटाउन हॉल पहुंच कर धर्मसभा में परिवर्तित हो गयी।

उन्होंने बताया कि मंगलाचरण के उपरांत उदयपुर नगर में विराजित 'आचार्यकल्प 108 श्री पुण्यसागरजी, आचार्य 108 श्री विहर्षसागरजी, आचार्य 108 श्री मयंक सागर, गणिनी आर्यिका 105 श्री सुभूषणमति माताजी, आर्यिका 105 श्री प्रसन्नमति माताजी'की उपस्थिति रही।

धर्मसभा में गणिनी आर्यिका 105 श्री सुप्रकाशमति एवं प्रसन्नमति माताजी ने अपने धर्माेपदेश में प्रथमेश भगवान ऋषभदेव की महिमा बताते हुए उनके द्वारा बताये गये मार्ग पर चलने का आव्हान किया। उन्होंने धर्मसभा में कहा कि बच्चों को संस्कार देना माता बहनों का काम है। वर्तमान पीढ़ी की विडम्बना यह है कि उनका झुकाव पाश्चात्य संस्कृति की और ज्यादा हो रहा है। इन्हें रोके बिना हम जैन धर्म को बढ़ावा नहीं दे सकते।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित