चंडीगढ़ , अप्रैल 24 -- हरियाणा सरकार ने एक बड़े वित्तीय घोटाले में सख्त कार्रवाई करते हुए विकास एवं पंचायत विभाग के अधीक्षक नरेश भुवानी को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 311(2)(b) के तहत आपराधिक साजिश और ठोस साक्ष्यों के आधार पर लिया गया।

सरकार ने इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टोलरेंस नीति का हिस्सा बताया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देशों के अनुसार, किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

जांच में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और ऐयू स्माल फाइनेंस बैंक के खातों में गंभीर अनियमितताएं सामने आयीं। मामला राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को सौंपा गया, जहां एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गयी।

जांच के दौरान खुलासा हुआ कि यह एक संगठित वित्तीय धोखाधड़ी का मामला है, जिसमें सरकारी धन को फर्जी लेनदेन के जरिए शेल कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। आरोप है कि नरेश भुवानी ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर फर्जी फर्म बनाकर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की।

रिपोर्ट के अनुसार, भुवानी को करीब 6.45 करोड़ रुपये प्राप्त हुए और उसने नकद राशि भी ली। छह अप्रैल 2026 को गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में उसने अपनी भूमिका स्वीकार की। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अब सीबीआई को सौंप दी गयी है। सरकार ने गवाहों और साक्ष्यों को प्रभावित किए जाने की आशंका के मद्देनजर यह कड़ा कदम उठाया है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित