चंडीगढ़ , अप्रैल 29 -- हरियाणा विधानसभा के सचिव पद पर तैनात एचसीएस अधिकारी की नियुक्ति कोनौ महीने बीतने के बाद भी आधिकारिक मान्यता नहीं मिल सकी है।
जुलाई 2025 में प्रदेश सरकार ने 2016 बैच के एचसीएस अधिकारी राजीव प्रसाद को नियमों में स्पष्ट प्रावधानन होने के बावजूद विधानसभा सचिव के पद पर तैनात किया था। उन्होंने 21 जुलाई 2025 को पदभार ग्रहण भी कर लिया, लेकिन अब तक उनकी नियुक्ति को विधिवत मान्यता नहीं दी गयी है।
इस बीच, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के एडवोकेट और विधि मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने एक बार फिर राज्यपाल, विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर इस मुद्दे को उठाया है। उन्होंने मांग की है कि नियुक्ति को तुरंत नियमित किया जाये या फिर नियमों में संशोधन किया जाये।
हेमंत कुमार के अनुसार, हरियाणा विधानसभा सचिवालय सेवा नियमावली, 1981 में एचसीएस अधिकारियों को इस पद पर नियुक्त करने का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में या तो नियमों में संशोधन आवश्यक है या नियुक्ति प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप किया जाना चाहिए।
नियमों के तहत विधानसभा सचिव की नियुक्ति अध्यक्ष द्वारा की जाती है, लेकिन इसके लिए राज्य सरकार से परामर्श जरूरी होता है। इस पद के लिए निर्धारित योग्यताओं में विधि स्नातक के साथ प्रशासनिक या न्यायिक अनुभव शामिल है। आमतौर पर इस पद पर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, न्यायिक अधिकारी या विधि क्षेत्र के अनुभवी व्यक्ति नियुक्त किये जाते हैं।
उल्लेखनीय है कि हरियाणा विधानसभा के इतिहास में पहली बार किसी एचसीएस अधिकारी को इस पद पर तैनात किया गया है। वर्ष 1988 में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी नरेश गुलाटी को अल्प अवधि के लिए यह जिम्मेदारी दी गयी थी।
हेमंत कुमार ने यह भी बताया कि पिछले नौ महीनों में इस गंभीर विषय पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी राजीव प्रसाद के नाम के साथ एचसीएस का उल्लेख नहीं किया गया है।
विशेष बात यह है कि 27 अप्रैल को बुलाये गये एक दिवसीय विशेष सत्र में, विपक्ष की अनुपस्थिति के बावजूद, कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित किये गये। ऐसे में सचिव पद की वैधता पर उठ रहे सवाल प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी प्रभाव डाल सकते हैं।
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