कुरुक्षेत्र , अक्टूबर 23 -- ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) ने हरियाणा सरकार से बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 108 लागू कर गुरुग्राम और नूंह क्षेत्रों में इलेवन पावर कंपनी लिमिटेड को जारी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस रद्द कराने की मांग की है।

फेडरेशन के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार के लिए आवश्यक कानूनी कदम उठाने चाहिए। फेडरेशन ने हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक बुलाकर राज्य में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस जारी करने और बिजली क्षेत्र के किसी भी प्रकार के निजीकरण के खिलाफ स्पष्ट नीति घोषित करने की मांग की है।

श्री दुबे, हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पुनीत कुंडू और महासचिव रविंदर सिंह घंगास ने संयुक्त बयान में कहा कि मौजूदा संकट हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) द्वारा समानांतर लाइसेंस जारी करने के फैसले से पैदा हुआ है। उनके अनुसार, इस निर्णय के बिजली क्षेत्र के सभी संबंधित पक्षों पर दूरगामी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं।

फेडरेशन ने कहा कि बिजली अधिनियम की धारा 108 के तहत राज्य सरकार को जनहित से जुड़े नीतिगत मामलों में राज्य विद्युत नियामक आयोग को निर्देश देने का अधिकार है। सरकार को इस अधिकार का इस्तेमाल करते हुए लाइसेंस के फैसले पर पुनर्विचार सुनिश्चित करना चाहिए और उसे रद्द कराने के लिए आवश्यक कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।

एआईपीईएफ ने कहा कि हरियाणा की अर्थव्यवस्था में कृषि और ग्रामीण बिजली आपूर्ति की अहम भूमिका है। ऐसे में मौजूदा सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियों के समानांतर निजी कंपनियों को काम करने की अनुमति देने के प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

फेडरेशन ने आशंका जताई कि निजी कंपनी अधिक राजस्व देने वाले औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को आकर्षित करने पर ध्यान देगी। इससे दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) के पास कृषि उपभोक्ताओं, ग्रामीण क्षेत्रों और रियायती दरों पर बिजली पाने वाले उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी अधिक रह जाएगी, जबकि उसकी आय घट सकती है। इससे सार्वजनिक बिजली वितरण व्यवस्था पर वित्तीय दबाव बढ़ने की आशंका है।

एआईपीईएफ के वी के गुप्ता ने बताया कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के बिजली कर्मचारियों तथा इंजीनियरों ने हरियाणा के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर राज्य के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के आंदोलन के प्रति समर्थन जताया है। फेडरेशन ने सरकार से तत्काल मंत्रिमंडल की बैठक बुलाकर समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस और बिजली क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ स्पष्ट नीति घोषित करने की मांग दोहराई।

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