चंडीगढ़ , अगस्त 27 -- हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त कार्रवाई समिति ने राज्य में एक निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने की प्रक्रिया का कड़ा विरोध जताते हुए राज्य सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।

समिति के वरिष्ठ प्रवक्ता देवेंद्र हुड्डा ने गुरुवार को कहा कि हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) की विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट तुरंत सार्वजनिक की जानी चाहिए तथा सभी संबंधित पक्षों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने और पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए।

श्री हुड्डा ने आरोप लगाया कि समानांतर लाइसेंस की दौड़ में शामिल इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड की व्यावसायिक योजना पूरी तरह 'चेरी-पिकिंग' पर आधारित है। कंपनी गुरुग्राम और नूंह के अधिक राजस्व वाले भारी लोड क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जबकि ग्रामीण और कृषि उपभोक्ताओं की अनदेखी की जा रही है।

समिति के प्रवक्ता रविंदर घनघस ने कहा कि यदि अधिक राजस्व वाले औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ता निजी क्षेत्र में चले जाते हैं तो राज्य की सरकारी बिजली वितरण कंपनी डीएचबीवीएन की वित्तीय स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा। इसका सीधा नुकसान किसानों, ग्रामीण उपभोक्ताओं और कम आय वाले परिवारों को होगा तथा क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था के कमजोर होने का खतरा पैदा हो जायेगा।

समिति ने विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 43 का हवाला देते हुए कहा कि यूनिवर्सल सप्लाई ऑब्लिगेशन के तहत वितरण लाइसेंसधारी को अपने निर्धारित क्षेत्र में सभी उपभोक्ताओं को बिना भेदभाव बिजली आपूर्ति करनी होती है। समिति का आरोप है कि निजी कंपनी का चरणबद्ध विस्तार मॉडल और केवल 15 प्रतिशत उपभोक्ताओं को हासिल करने का लक्ष्य इस प्रावधान की भावना के विपरीत है।

संयुक्त कार्रवाई समिति ने मांग की कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक कर इसे सभी हितधारकों और आम जनता के सामने रखा जाये। समिति ने सरकार से इस संवेदनशील मामले को तत्काल कैबिनेट या हरियाणा विधानसभा के पटल पर लाने की मांग की, ताकि सत्ता पक्ष और विपक्ष इस पर खुली चर्चा कर सकें।

समिति ने आरोप लगाया कि केवल एक वर्ष पुरानी कंपनी, जिसके पास बिजली वितरण एवं बुनियादी ढांचे का कोई अनुभव नहीं है, को 'एक्सप्रेस स्पीड' से लाइसेंस देने की प्रक्रिया तत्काल रोकी जानी चाहिए।

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) के मीडिया सलाहकार वीके गुप्ता ने बताया कि फेडरेशन ने एचईआरसी से पारदर्शिता, निष्पक्षता और व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस की याचिका खारिज करने का आग्रह किया है।

संयुक्त कार्रवाई समिति ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया तो राज्यभर के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर जनहित में बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

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