चंडीगढ़ , मई 30 -- हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर एवं पारंपरिक लोक कला 'सांझी' के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग विशेष अभियान चला रहा है। इसके तहत प्रदेश के विभिन्न मंडलों में तीन दिवसीय कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिससे इस प्राचीन लोक कला को संरक्षित करने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल तथा महानिदेशक के.एम. पांडुरंग के मार्गदर्शन में दो से चार जून तक मंडल स्तर पर सांझी कार्यशालाएं आयोजित होंगी। इन कार्यशालाओं में महिलाएं भाग लेकर सांझी कला के विभिन्न स्वरूपों को सीखेंगी और अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए सांझी का निर्माण करेंगी।

सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि सांझी केवल एक कला नहीं, बल्कि हरियाणा की लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन की जीवंत अभिव्यक्ति है। इस कला के माध्यम से युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रह सकती है। शहरीकरण और आधुनिक जीवनशैली के कारण नई पीढ़ी इस पारंपरिक कला से दूर होती जा रही है, इसलिए विभाग महिलाओं और युवाओं को इसके प्रति जागरूक करने के लिए विशेष कार्यशालाओं का आयोजन कर रहा है।

उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण पूरी तरह निःशुल्क होगा और सांझी सीखने की इच्छुक महिलाएं इसमें भाग लेकर इस पारंपरिक कला के विभिन्न पहलुओं को सीख सकेंगी। विभाग द्वारा प्रतिभागियों को आवश्यक मार्गदर्शन और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वे इस लोक कला को सीखकर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचा सकें।

विभाग ने महिलाओं से आह्वान किया है कि वे कार्यशालाओं में बढ़-चढ़कर भाग लें और हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित